By: Vikash Kumar (Vicky)

Aaj Ka Panchang 31 October 2026: आज 31 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। शनिवार होने के कारण यह दिन शनिदेव की पूजा, व्रत, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। आज दिन में सिद्ध योग और रवि योग के साथ त्रिपुष्कर योग का भी संयोग बन रहा है। वहीं शाम के समय भद्रा का आरंभ होगा, जिसका समापन अगले दिन यानी 1 नवंबर की सुबह होगा।
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग देखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और दिशाशूल की जानकारी मिलती है। ऐसे में अगर आप आज पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, खरीदारी या किसी नए काम की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले जान लीजिए 31 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण पंचांग।

31 अक्टूबर 2026: आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)
दिन: शनिवार
तिथि: कृष्ण पक्ष षष्ठी, शाम 4 बजकर 57 मिनट तक, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी।
मास: कार्तिक (पूर्णिमांत)
पक्ष: कृष्ण पक्ष
वार: शनिवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
नक्षत्र: आर्द्रा सुबह 7 बजकर 12 मिनट तक, इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा।
योग: सिद्ध योग शाम 5 बजकर 31 मिनट तक, इसके बाद साध्य योग।
करण: गर करण सुबह लगभग 6 बजकर 9 मिनट तक, इसके बाद वणिज करण और शाम 4 बजकर 57 मिनट के बाद विष्टि करण यानी भद्रा प्रभाव।

सूर्योदय: सुबह 5 बजकर 57 मिनट
सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 9 मिनट
चंद्रोदय: रात 10 बजकर 6 मिनट
चंद्रास्त: सुबह 11 बजकर 13 मिनट
आज बन रहे हैं विशेष योग, जानें कौन-सा योग रहेगा खास
31 अक्टूबर को पंचांग में कई विशेष योगों का उल्लेख किया गया है। इनमें रवि योग और त्रिपुष्कर योग को शुभ कार्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा दिन में सिद्ध योग भी रहेगा। आडल और विडाल योग का भी पंचांग में उल्लेख है, लेकिन इन्हें सामान्य शुभ योग समझना उचित नहीं है।

1. सिद्ध योग: आज सुबह से शाम 5 बजकर 31 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सिद्ध योग में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, साधना और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
2. रवि योग: आज सुबह 7 बजकर 12 मिनट के बाद रवि योग शुरू होगा, जो अगले दिन 1 नवंबर की सुबह 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में रवि योग को अशुभ प्रभावों को कम करने वाला और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
3. त्रिपुष्कर योग: आज शाम 4 बजकर 57 मिनट से त्रिपुष्कर योग शुरू होगा, जो 1 नवंबर की सुबह 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए कुछ शुभ कार्यों का फल तीन गुना प्राप्त होता है। हालांकि, कार्य की प्रकृति और अन्य पंचांग स्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
4. आडल और विडाल योग: आज सुबह विडाल योग का समय सूर्योदय से सुबह 7 बजकर 12 मिनट तक है। इसके बाद सुबह 7 बजकर 12 मिनट से अगले दिन सुबह 5 बजकर 39 मिनट तक आडल योग रहेगा। इन योगों में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से पहले ज्योतिषीय सलाह लेना उचित माना जाता है।

आज भद्रा कब से कब तक रहेगी? जानें भद्रा काल
आज 31 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 57 मिनट से भद्रा शुरू होगी। इसका समापन 1 नवंबर 2026 को सुबह 3 बजकर 51 मिनट पर होगा।
हिंदू धर्म में भद्रा काल को कई प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। विशेष रूप से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए भद्रा की स्थिति का विचार किया जाता है।
हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान कुछ विशेष पूजा-पाठ और साधना की जा सकती है। इसलिए किसी महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य से पहले स्थानीय पंचांग और योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लें।

शनिवार व्रत और शनिदेव पूजा का महत्व
शनिवार का दिन न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा, मंत्र जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना पुण्यकारी माना जाता है।
जो लोग शनिवार का व्रत रखते हैं, वे सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शनिदेव का स्मरण करके व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल और नीले फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
शनिवार को पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाने की भी धार्मिक परंपरा है। जरूरतमंद लोगों को काले तिल, उड़द की दाल, भोजन या वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है।

शनिदेव के मंत्र:
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति और सकारात्मकता प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
आज का राहुकाल कब है? (Rahu Kaal Today)
पंचांग के अनुसार शनिवार को राहुकाल सुबह 8 बजकर 45 मिनट से 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।
हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और दैनिक कार्य किए जा सकते हैं।

31 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat Today)
आज के दिन पूजा-पाठ, ध्यान और अन्य शुभ कार्यों के लिए कुछ विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 14 मिनट से 5 बजकर 6 मिनट तक।
प्रातः संध्या: सुबह 4 बजकर 40 मिनट से 5 बजकर 57 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 10 मिनट से 11 बजकर 55 मिनट तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 1 बजकर 25 मिनट से 2 बजकर 10 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5 बजकर 9 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक।
सायंकालीन संध्या: शाम 5 बजकर 9 मिनट से 6 बजकर 26 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 8 मिनट से 11 बजकर 59 मिनट तक।
आज के अशुभ समय (Ashubh Muhurat Today)
राहुकाल: सुबह 8 बजकर 45 मिनट से 10 बजकर 9 मिनट तक।
यमगंड: दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 21 मिनट तक।
गुलिक काल: सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 21 मिनट तक।
भद्रा काल: शाम 4 बजकर 57 मिनट से अगले दिन सुबह 3 बजकर 51 मिनट तक।
वर्ज्य काल: शाम 6 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक।
आज किस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए? (Disha Shool)
शनिवार के दिन दिशाशूल पूर्व दिशा में माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज पूर्व दिशा की ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी जरूरी काम से इस दिशा में जाना आवश्यक हो, तो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार यात्रा से पहले कुछ शुभ उपाय किए जाते हैं।
दिशाशूल का विचार विशेष रूप से लंबी यात्रा और महत्वपूर्ण कार्यों के समय किया जाता है। इसे धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
आज का धार्मिक महत्व और क्या करें?
31 अक्टूबर को शनिवार होने के कारण शनिदेव की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। आज श्रद्धालु सुबह स्नान करके शनिदेव की पूजा कर सकते हैं। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ, शनि मंत्र का जाप और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
आज के दिन किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें। अपने कर्मों को बेहतर बनाने और दूसरों की सहायता करने का संकल्प लें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सेवा, दान और सदाचार से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
निष्कर्ष: 31 अक्टूबर 2026 का शनिवार धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि शाम तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी शुरू होगी। दिन में सिद्ध और रवि योग के साथ शाम से त्रिपुष्कर योग का संयोग बनेगा। वहीं शाम 4 बजकर 57 मिनट से भद्रा भी शुरू होगी। ऐसे में पूजा-पाठ और शुभ कार्यों की योजना बनाते समय पंचांग के सभी समयों का ध्यान रखना लाभकारी रहेगा।
इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। शुभ-अशुभ समय और पूजा-पाठ से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों एवं परंपराओं के अनुसार बदल सकती हैं। पंचांग के समय पटना, बिहार के स्थानीय समय के आधार पर दिए गए हैं। अन्य शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।
