By: Vikash Kumar (Vicky)


HealthWealth Summit 2026: आजकल स्वस्थ रहने और गंभीर बीमारियों से बचने के लिए लोग नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराने लगे हैं। कई लोग हर कुछ महीनों में फुल बॉडी चेकअप, ब्लड टेस्ट और तरह-तरह के स्कैन करवाते हैं। हेल्थ पैकेज के नाम पर हजारों रुपये खर्च करना भी आम बात हो गई है। लेकिन क्या वाकई हर व्यक्ति को बार-बार सभी तरह के मेडिकल टेस्ट कराने की जरूरत होती है? क्या बिना किसी लक्षण के फुल बॉडी चेकअप करवाना हमेशा फायदेमंद होता है?
इन्हीं महत्वपूर्ण सवालों पर HealthWealth Summit 2026 में देश के जाने-माने चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यानी बीमारियों से बचाव के लिए की जाने वाली जांच हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होनी चाहिए। किसी व्यक्ति को कौन-सा टेस्ट करवाना चाहिए और कितनी बार करवाना चाहिए, यह उसकी उम्र, पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री, जीवनशैली, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और मौजूदा लक्षणों के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
डॉ. नवीन डांग, डॉ. हर्ष महाजन और डॉ. अरविंद लाल ने लोगों को बिना जरूरत मेडिकल टेस्ट कराने से बचने और सही पैथोलॉजी लैब चुनने की सलाह दी। आइए जानते हैं डॉक्टरों ने हेल्थ चेकअप, ब्लड टेस्ट, बॉडी स्कैन और सही डायग्नोस्टिक सेंटर चुनने को लेकर क्या महत्वपूर्ण बातें बताई हैं।

हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता फुल बॉडी चेकअप
आजकल बाजार में कई तरह के हेल्थ चेकअप पैकेज उपलब्ध हैं। इनमें ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, लिवर फंक्शन, किडनी फंक्शन, थायरॉइड और कई अन्य जांच शामिल होती हैं। कुछ पैकेज में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और दूसरे स्कैन भी शामिल कर दिए जाते हैं।
लोग अक्सर इन पैकेजों को इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ज्यादा जांच कराने से बीमारी का पता पहले चल जाएगा। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति को हर प्रकार की जांच की आवश्यकता नहीं होती।
बिना किसी चिकित्सकीय कारण के जरूरत से ज्यादा टेस्ट करवाने से कई बार ऐसी रिपोर्ट सामने आ सकती हैं जिनमें मामूली बदलाव होते हैं, लेकिन उनका वास्तविक बीमारी से कोई संबंध नहीं होता। इससे मरीज अनावश्यक रूप से परेशान हो सकता है और आगे कई अतिरिक्त जांचों की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए केवल पैकेज में ज्यादा टेस्ट होने के कारण उसे चुनना समझदारी नहीं है। जांच हमेशा डॉक्टर की सलाह और व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जरूरत के अनुसार होनी चाहिए।

उम्र और फैमिली हिस्ट्री के आधार पर तय होनी चाहिए जांच
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि हर व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जरूरत अलग होती है। किसी व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास और जीवनशैली के आधार पर उसकी जांच की योजना तैयार की जानी चाहिए।
उदाहरण के लिए, यदि परिवार में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग का इतिहास रहा है, तो संबंधित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह पर कुछ जांच समय-समय पर करवानी पड़ सकती हैं।
इसी तरह अधिक वजन, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान जैसी स्थितियां भी कुछ बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती हैं। ऐसे में व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उचित जांच का चयन किया जाता है।
महिलाओं और पुरुषों के लिए भी उम्र तथा स्वास्थ्य जोखिम के अनुसार अलग-अलग स्क्रीनिंग की जरूरत हो सकती है। इसलिए इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य हेल्थ चेकअप लिस्ट देखकर खुद से सभी टेस्ट करवाना सही तरीका नहीं है।

बिना लक्षण के भी कब जरूरी हो सकती है जांच?
यह समझना जरूरी है कि किसी बीमारी के लक्षण दिखाई न देने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को किसी जांच की जरूरत ही नहीं है। कुछ बीमारियां शुरुआती अवस्था में बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद हो सकती हैं।
इसी वजह से डॉक्टर कुछ खास आयु वर्ग और जोखिम वाले लोगों को नियमित स्क्रीनिंग की सलाह देते हैं।
उदाहरण के लिए:
डायबिटीज की जांच: जिन लोगों में डायबिटीज का जोखिम अधिक है, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ब्लड शुगर या HbA1c टेस्ट करवाने की जरूरत हो सकती है।
ब्लड प्रेशर की जांच: हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रहता है। इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच महत्वपूर्ण है।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट: हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम का आकलन करने के लिए डॉक्टर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
कैंसर स्क्रीनिंग: उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर कुछ कैंसर की स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है।
हालांकि, इन जांचों का समय और आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बॉडी स्कैन कराने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
आजकल फुल बॉडी स्कैन और एडवांस इमेजिंग टेस्ट को लेकर भी लोगों में काफी दिलचस्पी बढ़ी है। कई लोग बिना किसी लक्षण या विशेष जोखिम के भी पूरे शरीर का स्कैन करवाने के बारे में सोचते हैं।
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए बिना चिकित्सकीय जरूरत के CT Scan, MRI या अन्य इमेजिंग जांच करवाना जरूरी नहीं है।
इन जांचों की सलाह किसी विशेष बीमारी के संदेह, लक्षण, शारीरिक जांच या मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर दी जाती है।
बिना जरूरत स्कैन कराने से कई बार ऐसी छोटी असामान्यताएं सामने आ सकती हैं जिनका कोई चिकित्सकीय महत्व नहीं होता। इसके कारण मरीज को अतिरिक्त जांच, चिंता और अनावश्यक खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा CT Scan जैसी कुछ जांचों में रेडिएशन का इस्तेमाल होता है। इसलिए ऐसी जांच केवल उचि
त चिकित्सकीय कारण होने पर ही करवानी चाहिए।
सही पैथोलॉजी लैब कैसे चुनें? डॉक्टरों ने बताया जरूरी फॉर्मूला
हेल्थ चेकअप में केवल सही टेस्ट का चुनाव करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि पैथोलॉजी लैब की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए ब्लड टेस्ट या अन्य पैथोलॉजी जांच करवाने से पहले लैब का चुनाव सावधानी से करना चाहिए।
1. लैब की मान्यता और गुणवत्ता जांचें
किसी भी पैथोलॉजी लैब का चयन करने से पहले उसकी मान्यता और गुणवत्ता संबंधी जानकारी प्राप्त करें। भारत में NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से मान्यता प्राप्त लैब को प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि, यह भी जांचें कि संबंधित टेस्ट लैब के मान्यता प्राप्त दायरे में शामिल है या नहीं।

2. प्रशिक्षित स्टाफ और विशेषज्ञों की उपलब्धता
अच्छी लैब में प्रशिक्षित टेक्नीशियन और योग्य विशेषज्ञों की उपलब्धता होनी चाहिए। ब्लड सैंपल लेने से लेकर उसकी जांच और रिपोर्ट तैयार करने तक सभी प्रक्रियाओं में सावधानी बरतना जरूरी है।
3. मशीनों और तकनीक की गुणवत्ता
पैथोलॉजी जांच में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की गुणवत्ता और उनका नियमित रखरखाव महत्वपूर्ण है। लैब में उपकरणों का सही कैलिब्रेशन और क्वालिटी कंट्रोल होना चाहिए, ताकि जांच के परिणाम भरोसेमंद रहें।
4. रिपोर्ट की सटीकता और विश्वसनीयता
लैब का चुनाव केवल कम कीमत या आकर्षक पैकेज देखकर न करें। यह देखें कि वहां जांच की प्रक्रिया कितनी व्यवस्थित है और रिपोर्ट में जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है या नहीं।

5. सैंपल कलेक्शन की स्वच्छता
ब्लड सैंपल लेते समय साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन होना चाहिए। इस्तेमाल की जाने वाली सुई और अन्य जरूरी सामग्री सुरक्षित एवं उचित तरीके से इस्तेमाल की जानी चाहिए।
6. होम सैंपल कलेक्शन की सुविधा
यदि आप घर से बाहर जाने में असमर्थ हैं या घर से ही सैंपल देना चाहते हैं, तो लैब की होम कलेक्शन सुविधा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान भी सैंपल की पहचान, सही तरीके से संग्रह और सुरक्षित परिवहन का ध्यान रखा जाना चाहिए।
गलत रिपोर्ट से हो सकती है परेशानी, इसलिए दूसरी राय लेना भी जरूरी
कई बार किसी जांच की रिपोर्ट में सामान्य सीमा से थोड़ा अलग परिणाम दिखाई देता है। ऐसे में लोग तुरंत घबरा जाते हैं और इंटरनेट पर बीमारी के लक्षण खोजने लगते हैं।
लेकिन किसी एक टेस्ट की रिपोर्ट देखकर बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। रिपोर्ट की व्याख्या मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों के साथ मिलाकर की जाती है।
कुछ मामलों में डॉक्टर दोबारा टेस्ट कराने या किसी दूसरी लैब से जांच करवाने की सलाह भी दे सकते हैं। यदि रिपोर्ट और मरीज की शारीरिक स्थिति में अंतर दिखाई देता है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
इसलिए रिपोर्ट में कोई असामान्य परिणाम आने पर खुद से दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का मतलब ज्यादा टेस्ट नहीं, सही समय पर सही जांच
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का उद्देश्य केवल बीमारियों का पता लगाना नहीं, बल्कि उन्हें होने से रोकने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए सही कदम उठाना भी है।
इसके लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य की निगरानी जरूरी है।
विशेषज्ञों की सलाह का मुख्य संदेश यही है कि हेल्थ चेकअप को केवल एक पैकेज या नियमित औपचारिकता की तरह नहीं देखना चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी उम्र, स्वास्थ्य जोखिम और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार जांच करवानी चाहिए।
बिना जरूरत महंगे ब्लड टेस्ट और बॉडी स्कैन करवाने के बजाय डॉक्टर से यह समझना ज्यादा बेहतर है कि आपके लिए कौन-सी जांच वास्तव में जरूरी है।
HealthWealth Summit 2026 में चिकित्सा विशेषज्ञों की चर्चा ने एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है कि स्वस्थ रहने के लिए हर टेस्ट करवाना जरूरी नहीं है। सही समय पर सही जांच करवाना और भरोसेमंद पैथोलॉजी लैब का चयन करना अधिक महत्वपूर्ण है। उम्र, पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री, जीवनशैली और लक्षणों के आधार पर बनाई गई हेल्थ चेकअप योजना व्यक्ति को अनावश्यक जांच और खर्च से बचाने में मदद कर सकती है।
इसलिए अगली बार फुल बॉडी चेकअप पैकेज खरीदने या कोई महंगा स्कैन करवाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। याद रखें, बेहतर स्वास्थ्य का रास्ता अधिक जांच से नहीं, बल्कि सही जांच और सही देखभाल से होकर गुजरता है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सा विशेषज्ञों की सामान्य सलाह और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर से जुड़े सिद्धांतों पर आधारित है। यह किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। कौन-सा टेस्ट आवश्यक है और कितनी बार करवाना चाहिए, इसका निर्णय व्यक्ति की उम्र, लक्षण, स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर योग्य चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए। किसी भी जांच या उपचार से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
