By: Mala Mandal
नई दिल्ली: देश में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। विपक्ष जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों पर संसद में खुली बहस की चुनौती दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधे चुनौती देते हुए कहा है कि भाजपा SIR और चुनाव आयोग से जुड़े हर मुद्दे पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है। इसके लिए संसद का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है।

अमित शाह ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अगर चुनाव आयोग या मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कोई सवाल है, तो उन्हें संसद में आकर चर्चा करनी चाहिए। भाजपा के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। शाह ने कहा कि जरूरत पड़ने पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस पूरे मामले पर बहस कराई जा सकती है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अमित शाह की सीधी चुनौती
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में राहुल गांधी और अखिलेश यादव का नाम लेते हुए कहा कि वह दोनों नेताओं को चुनौती देते हैं कि वे संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आएं। उन्होंने कहा कि भाजपा SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े विवाद पर संसद में हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संसद के भीतर चर्चा करने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित करता है। उनके मुताबिक विपक्ष की मंशा गंभीर चर्चा करने की नहीं है, बल्कि राजनीतिक हंगामा खड़ा करने की है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय सड़कों पर प्रदर्शन करना पसंद करते हैं। शाह ने विपक्ष की राजनीति की तुलना क्रिकेट मैच से करते हुए कहा कि जब कोई टीम हारती है, तो उसे अपनी कमियों पर काम करना चाहिए, लेकिन विपक्ष हार के बाद अंपायर पर बेईमानी का आरोप लगाने लगता है।

क्या है SIR विवाद, जिस पर आमने-सामने हैं भाजपा और विपक्ष?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और सत्यापन करता है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल रहें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को नियमों के अनुसार ठीक किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की आशंका है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। वहीं भाजपा का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और त्रुटिरहित बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है। पार्टी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव कर रही है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी बढ़ा विवाद
SIR के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राजनीतिक विवाद गहराया हुआ है। कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इस कार्यक्रम को लेकर विपक्ष का उद्देश्य चुनाव आयोग के खिलाफ अपने आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विपक्ष का प्रस्तावित पब्लिक इम्पीचमेंट कार्यक्रम वास्तविक संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया नहीं है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया अलग है और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन करना होता है। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अमित शाह ने विपक्ष को संसद में बहस करने की चुनौती देकर सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

भाजपा की चुनावी जीत का भी अमित शाह ने किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने भाजपा की विभिन्न राज्यों में हुई चुनावी सफलताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, पुडुचेरी और असम में भाजपा तथा एनडीए के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने कई राज्यों में पार्टी पर भरोसा जताया है। शाह ने कहा कि हरियाणा में भाजपा ने सबसे अधिक सीटें हासिल कर सरकार बनाई। महाराष्ट्र में एनडीए को बड़ी सफलता मिली। बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना। दिल्ली में करीब तीन दशक बाद भाजपा की सरकार बनी। असम में पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफलता हासिल की। उन्होंने पश्चिम बंगाल का भी उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। शाह का कहना था कि चुनावों में हार के बाद विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगता है, जबकि उसे जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए।

2027 उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर भी कार्यकर्ताओं को दिया संदेश
लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने केवल SIR विवाद पर ही विपक्ष को घेरा, बल्कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की कोशिश की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव की तैयारी में जुटने की अपील की। शाह ने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा एक बार फिर मजबूत बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने महाभारत में अर्जुन के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का उदाहरण देते हुए कार्यकर्ताओं से संगठन और चुनावी रणनीति पर पूरा ध्यान लगाने को कहा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला पहले से ही काफी अहम माना जा रहा है। ऐसे में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को एक साथ चुनौती देने के अमित शाह के बयान को आगामी राजनीतिक संघर्ष से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

संसद में बहस की चुनौती से बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?
अमित शाह की इस चुनौती के बाद अब राजनीतिक नजरें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। एक तरफ भाजपा संसद में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि देश की चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनती है या टकराव और गहराता है। फिलहाल अमित शाह के बयान ने CEC और SIR विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या संसद के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा का रास्ता खुलता है।

SIR और चुनाव आयोग को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जारी विवाद अब संसद में बहस की चुनौती तक पहुंच गया है। अमित शाह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को खुला न्योता दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति में और कितना बड़ा रूप लेता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।


