
By: Mala Mandal
देवघर। धनतेरस के अवसर पर देवघर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। सोने-चांदी के आभूषणों की दुकानों से लेकर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानों तक ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। खास बात यह है कि इस बार बाजार में झाड़ू की दुकानों पर भी लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है। महिलाएं और पुरुष अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार झाड़ू की खरीदारी कर रहे हैं। मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और वैभव का आगमन होता है। यही वजह है कि सोने-चांदी की खरीदारी के साथ-साथ लोग झाड़ू को भी शुभ खरीदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

धनतेरस का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। आमतौर पर लोग सोना, चांदी, पीतल, तांबा और अन्य धातुओं से बने बर्तन खरीदते हैं। लेकिन भारतीय परंपरा में झाड़ू की खरीदारी का भी अपना विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि झाड़ू घर की दरिद्रता और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है। इसके माध्यम से घर में स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का संदेश भी मिलता है।
झाड़ू खरीदने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता?
धनतेरस के अवसर पर झाड़ू खरीदने की धार्मिक मान्यता को लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। अमृत को जीवन, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार अमृत का संबंध ऐसे वातावरण से भी जोड़ा जाता है, जहां स्वच्छता और शुद्धता बनी रहे। जिस स्थान पर साफ-सफाई रहती है, वहीं सकारात्मकता और शुभता का वास होता है। घर को स्वच्छ रखने में झाड़ू की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी कारण धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने की परंपरा प्रचलित है।

उन्होंने बताया कि झाड़ू केवल सफाई का साधन नहीं है, बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में साफ-सफाई और स्वच्छता बनी रहती है, वहां माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ लोग धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदकर घर लाते हैं।
झाड़ू के साथ सूप और पैला खरीदने की भी परंपरा
धनतेरस पर केवल झाड़ू ही नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू वस्तुओं की खरीदारी का भी विशेष महत्व है। पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने बताया कि इस दिन अनाज साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सूप की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है। सूप का उपयोग अनाज से भूसी और अन्य अशुद्धियों को अलग करने के लिए किया जाता है। इसके पीछे भी स्वच्छता और शुद्धता की वही धार्मिक भावना जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि धान और अनाज को मापने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले पैला की खरीदारी भी धनतेरस के दिन की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में पैला को भी माता लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है। चूंकि धान और अनाज को घर की खुशहाली, अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इनसे जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं का भी विशेष महत्व है।

माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों से जुड़ी है परंपरा
पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने बताया कि माता लक्ष्मी की पूजा केवल धन-संपत्ति तक सीमित नहीं है। माता लक्ष्मी को विभिन्न स्वरूपों में पूजा जाता है। इनमें धान्य लक्ष्मी और स्वर्ण लक्ष्मी सहित अन्य स्वरूप शामिल हैं। धान्य लक्ष्मी को अन्न और खाद्यान्न की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जबकि स्वर्ण लक्ष्मी धन और वैभव का प्रतीक हैं। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर धनतेरस के दिन सोने-चांदी के साथ-साथ झाड़ू, सूप और पैला जैसी पारंपरिक वस्तुओं की खरीदारी की जाती है। लोगों का विश्वास है कि इन वस्तुओं को घर लाने से सुख-समृद्धि बनी रहती है और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

बाजारों में दिख रहा परंपरा और आस्था का संगम
धनतेरस को लेकर देवघर के बाजारों में सुबह से ही खरीदारी का सिलसिला जारी है। दुकानदारों के अनुसार इस अवसर पर ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। जहां एक ओर लोग सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर झाड़ू, सूप और पैला जैसी पारंपरिक वस्तुओं की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बनी हुई है।

धनतेरस का पर्व केवल खरीदारी का अवसर नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। आधुनिक समय में जहां लोग महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान और कीमती धातुओं की खरीदारी को प्राथमिकता देते हैं, वहीं आज भी झाड़ू, सूप और पैला जैसी पारंपरिक वस्तुओं के प्रति लोगों की आस्था कायम है।

कुल मिलाकर धनतेरस पर देवघर के बाजारों में खरीदारी की रौनक के बीच झाड़ू की खरीदारी विशेष आकर्षण बनी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वच्छता, शुद्धता और अन्न की समृद्धि को माता लक्ष्मी की कृपा से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि धनतेरस के दिन लोग झाड़ू, सूप और पैला खरीदकर वर्षों पुरानी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए हैं।



