By: Vikash Kumar (Vicky)

लातेहार/झारखंड। आदिवासी नेत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की आत्महत्या के मामले को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को लातेहार में भाजपा कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और निशा भगत की मौत की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।
भाजपा नेताओं का कहना है कि निशा भगत की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। यदि इस मामले में किसी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।

समाहरणालय गेट पर भाजपा का प्रदर्शन
निशा भगत की मौत के विरोध में शनिवार की शाम लातेहार में भाजपा कार्यकर्ता एकजुट हुए। समाहरणालय गेट के सामने आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाकर राज्य सरकार के प्रति अपना आक्रोश जाहिर किया।
इस दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य में महिलाओं और आदिवासी समाज की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निशा भगत की मौत एक बेहद दुखद घटना है और इसके पीछे की परिस्थितियों की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा जिला अध्यक्ष बंशी यादव ने किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा सरकार के सामने एक बड़ा सवाल बन चुकी है। निशा भगत ने जिस परिस्थिति में आत्महत्या की, वह गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

निशा भगत की मौत के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
दरअसल, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत की मौत के बाद झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आक्रोश देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को रांची स्थित अपने आवास पर निशा भगत मृत पाई गई थीं। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर फेसबुक लाइव के दौरान जमीन दलालों, सरकारी अधिकारियों और पुलिस प्रशासन की कथित निष्क्रियता को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।
उनके फेसबुक लाइव के बाद हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा समेत विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
निशा भगत की मौत के बाद आदिवासी समाज के लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा हो सके।

भाजपा ने सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल
भाजपा नेताओं ने इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जब निशा भगत ने फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी परेशानी और आरोप सार्वजनिक किए थे, तब प्रशासन को तत्काल सक्रिय होना चाहिए था।
भाजपा नेताओं ने यह भी मांग की है कि निशा भगत के अंतिम फेसबुक लाइव, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित लोगों के साथ हुई बातचीत की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
भाजपा का आरोप है कि मामले में सामने आए तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सीबीआई जांच की मांग भी तेज
निशा भगत की मौत के मामले में भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, जिससे किसी प्रकार के दबाव या प्रभाव की आशंका न रहे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निशा भगत किन परिस्थितियों से गुजर रही थीं और उनकी मौत के पीछे क्या कारण थे, इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी निशा भगत के परिजनों से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच कराने की बात कही है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को जरूरी बताया है।

परिजनों को न्याय दिलाने की मांग
भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान मांग की कि निशा भगत के परिवार को न्याय मिलना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
निशा भगत के पिता ने भी पुलिस को लिखित शिकायत देकर कुछ लोगों पर अपनी बेटी को मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पुलिस को इन आरोपों की जांच कर सभी तथ्यों को सामने लाना चाहिए।

झारखंड की राजनीति में बढ़ सकता है विवाद
निशा भगत की मौत का मामला अब केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। भाजपा लगातार हेमंत सोरेन सरकार को घेर रही है। वहीं, विभिन्न संगठनों की ओर से भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि निशा भगत की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है।

अब सबकी नजर पुलिस जांच और सरकार के अगले कदम पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी, सभी संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। निशा भगत को न्याय दिलाने की मांग के बीच भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगी।
