By: Vikash Kumar (Vicky)

गुमला (झारखंड): झारखंड के गुमला जिले में आदिवासी समाज की सक्रिय नेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत के आकस्मिक निधन से शोक की लहर है। उनके निधन की खबर से सामाजिक, राजनीतिक और जनजातीय संगठनों से जुड़े लोगों में गहरा दुख है। शनिवार को दिवंगत निशा भगत को श्रद्धांजलि देने के लिए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास गुमला पहुंचे। उन्होंने निशा भगत के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दी श्रद्धांजलि
निशा भगत के निधन के बाद उनके आवास पर लगातार लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनजातीय संगठनों और स्थानीय लोगों ने उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी गुमला पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेत्री को याद करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

रघुवर दास के पहुंचने से श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी देखने को मिली। निशा भगत के निधन को आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
निशा भगत के निधन से जनजातीय समाज में शोक
निशा भगत आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचानी जाती थीं। वह जनजातीय समाज के अधिकारों, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न सामुदायिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रही थीं। उनके साथ काम कर चुके लोगों के अनुसार, वह निडर और संघर्षशील स्वभाव की थीं। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी वह जानी जाती थीं।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद गुमला सहित झारखंड के अलग-अलग इलाकों में शोक की प्रतिक्रिया देखने को मिली। उनके परिचितों और समर्थकों ने उनके सामाजिक जीवन और सक्रियता को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

संगठनात्मक गतिविधियों में भी रही सक्रिय
निशा भगत का सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से पुराना जुड़ाव रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2008-09 के दौरान गुमला में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ने के बाद उनकी पहचान सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर सक्रिय रहने वाली कार्यकर्ता के रूप में बनी।

उनके करीबियों का कहना है कि वह अपने विचारों को बेबाकी से सामने रखती थीं। सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण ने उन्हें स्थानीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई थी। यही वजह है कि उनके निधन के बाद बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
निशा भगत का पार्थिव शरीर गुमला पहुंचने के बाद डीएसपी रोड स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। परिवार के सदस्यों के साथ उनके परिचितों, समर्थकों और विभिन्न संगठनों के लोगों ने अंतिम दर्शन किए।

इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाया गया, जहां आदिवासी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिजन और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्पक्ष जांच की मांग भी उठी
निशा भगत के निधन के बाद उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग सामने आई है। विश्व हिंदू परिषद सहित कुछ संगठनों ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है।
हालांकि, इन संगठनों की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच की मांग को जांच एजेंसी के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले की वास्तविक परिस्थितियों का पता आधिकारिक जांच के बाद ही चल सकेगा।

श्रद्धांजलि के साथ न्याय की मांग
गुमला में निशा भगत को श्रद्धांजलि देने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित अन्य राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी ने इस घटना को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर जहां लोग दिवंगत नेत्री को अंतिम विदाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके निधन की परिस्थितियों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो रही है।

निशा भगत के निधन से उनके परिवार, परिचितों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों में गहरा दुख है। उनके समर्थकों का कहना है कि सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता और संघर्ष को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

फिलहाल गुमला में शोक का माहौल है। लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। दिवंगत निशा भगत को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच जारी है।

