By: Vikash Kumar (Vicky)

Narak Chaturdashi 2026 Yam Deepak: दिवाली के त्योहार में नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाने के साथ मृत्यु के देवता यमराज के नाम से भी एक विशेष दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपक या यम का दीया कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छोटी दिवाली पर यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों की लंबी आयु की कामना की जाती है।
साल 2026 में नरक चतुर्दशी की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस है। दरअसल, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। ऐसे में यम दीपक 7 नवंबर 2026, शनिवार की शाम को जलाया जाएगा, जबकि नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, रविवार की सुबह किया जाएगा।
अगर आप भी छोटी दिवाली पर यम दीपक जलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं इसका सही समय, दीपक जलाने की विधि, सही दिशा और इससे जुड़े जरूरी नियम।

यम दीपक 2026 कब जलाएं? जानें सही तारीख और समय
हिंदू धर्म में यम दीपक जलाने की परंपरा बेहद पुरानी मानी जाती है। इसे यमराज के नाम से किया जाने वाला दीपदान कहा जाता है। इस साल कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 10:47 बजे शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह लगभग 11:27 बजे समाप्त होगी।
द्रिक पंचांग पर आधारित प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 7 नवंबर की शाम यम दीपक जलाने का समय इस प्रकार है।
यम दीपक की तारीख: 7 नवंबर 2026, शनिवार
शुभ समय: शाम 5:37 बजे से रात 8:10 बजे तक
नरक चतुर्दशी: 8 नवंबर 2026, रविवार
अभ्यंग स्नान का समय: सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक (नई दिल्ली के अनुसार)
ध्यान दें कि मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि जरूर करें।

यम दीपक किस दिशा में जलाना चाहिए?
यम दीपक जलाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यमराज को दक्षिण दिशा का स्वामी माना जाता है। इसलिए कई परिवारों में यम दीपक की बाती दक्षिण दिशा की ओर रखकर दीपदान किया जाता है।
हालांकि, कुछ पारंपरिक विधियों में दीपक को पूर्व दिशा की ओर रखने का भी उल्लेख मिलता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पुरोहित के निर्देशों का पालन करना उचित है।
यम दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर या प्रवेश द्वार के पास सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। दीपक ऐसी जगह रखें, जहां उसे किसी के पैर से ठोकर न लगे और आग लगने का खतरा न हो।

यमराज के नाम का दीपक कैसे जलाएं? जानें पूरी विधि
यम दीपक जलाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है। आप घर में उपलब्ध सामान्य पूजा सामग्री से भी यह धार्मिक परंपरा पूरी कर सकते हैं।
1. मिट्टी का दीपक लें: सबसे पहले एक साफ मिट्टी का दीपक लें। परंपरा के अनुसार यम दीपक के लिए चौमुखा यानी चार बातियों वाला दीपक भी इस्तेमाल किया जाता है।
2. सरसों का तेल भरें: दीपक में सरसों का तेल डालें। कुछ परिवारों में तिल के तेल का भी इस्तेमाल किया जाता है।
3. रुई की बाती लगाएं: दीपक में रुई की बाती लगाएं। यदि चौमुखा दीपक है, तो उसमें चार बातियां लगाई जा सकती हैं।
4. यमराज का स्मरण करें: दीपक जलाने से पहले यमराज का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और लंबी आयु की कामना करें।
5. घर के बाहर दीपदान करें: इसके बाद दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें। ध्यान रखें कि दीपक हवा या किसी अन्य कारण से बुझने की स्थिति में न हो।

यम दीपक जलाते समय इन 5 नियमों का रखें ध्यान
छोटी दिवाली पर यम दीपक जलाते समय कुछ पारंपरिक नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
1. साफ-सफाई का रखें ध्यान: दीपक जलाने से पहले घर के मुख्य द्वार और आसपास की जगह को साफ कर लें।
2. सही समय पर करें दीपदान: यम दीपक शाम के प्रदोष काल में जलाने की परंपरा है। इस साल इसके लिए 7 नवंबर की शाम का समय बताया गया है।
3. दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें: दीपक को ऐसी जगह रखें, जहां बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच न हो।
4. श्रद्धा और विश्वास से करें पूजा: दीपक जलाते समय मन में सकारात्मक भावना रखें और यमराज का स्मरण करें।
5. दीपक को पैर से न छुएं: दीपक के आसपास सावधानी रखें। उसे ऐसी जगह न रखें, जहां आने-जाने वाले लोगों के पैर लग सकते हों।

यम दीपक जलाने का धार्मिक महत्व क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यम दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की रक्षा करते हैं। छोटी दिवाली पर यह दीपक जलाने की परंपरा अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और लंबी आयु की कामना से जुड़ी हुई है।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि यम दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। यही वजह है कि दिवाली से एक दिन पहले कई घरों में यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है।
नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली में क्या है अंतर?
नरक चतुर्दशी को ही छोटी दिवाली, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके हजारों महिलाओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था। इसी विजय की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।
इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसके अलावा शाम के समय घरों में दीपक जलाए जाते हैं और यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है।

यम दीपक और अभ्यंग स्नान की तारीख अलग क्यों है?
साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। इसलिए यम दीपदान के लिए 7 नवंबर की शाम का समय बताया गया है, जबकि सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि होने के कारण नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह किया जाएगा।

यही वजह है कि इस साल यम दीपक और नरक चतुर्दशी के सुबह के अनुष्ठानों की तारीख अलग-अलग है।
Disclaimer (अस्वीकरण): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और प्रकाशित पंचांग गणनाओं पर आधारित है। यम दीपक जलाने की विधि और दिशा में क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है। शुभ मुहूर्त भी स्थान के अनुसार बदल सकता है। इसे धार्मिक जानकारी के रूप में लें, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी न मानें।

