
By: Vikash Kumar (Vicky)
Aaj Ka Panchang 6 November 2026: आज शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है। आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इसके साथ ही आज शुक्र प्रदोष व्रत का भी विशेष संयोग बन रहा है। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर विधि-विधान से पूजा करने और शुभ समय में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली आती है। आज का दिन खरीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, आभूषण और घर की उपयोगी वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। वहीं शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और दीपदान करने का भी विशेष महत्व है। शुक्रवार होने के कारण आज माता लक्ष्मी की आराधना करना भी शुभ माना जाता है।

पंचांग के अनुसार, आज सुबह 10 बजकर 30 मिनट तक कार्तिक कृष्ण द्वादशी तिथि रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। हस्त नक्षत्र पूरे दिन प्रभावी रहेगा। चंद्रदेव कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग, शुभ मुहूर्त, अशुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त और पूजा-पाठ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
6 नवंबर 2026 का पंचांग (Aaj Ka Panchang 6 November 2026)
दिन: शुक्रवार
तिथि: कार्तिक कृष्ण द्वादशी सुबह 10:30 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि
पर्व: धनतेरस और शुक्र प्रदोष व्रत
मास: कार्तिक
पक्ष: कृष्ण पक्ष
विक्रम संवत: 2083
नक्षत्र: हस्त नक्षत्र पूरे दिन
चंद्र राशि: कन्या
योग: सटीक योग और उसके समाप्ति समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।
करण: स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित होगा।
सूर्योदय: स्थान के अनुसार अलग-अलग
सूर्यास्त: स्थान के अनुसार अलग-अलग
चंद्रोदय: स्थान के अनुसार अलग-अलग
धनतेरस 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस का त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम प्रदोष काल में दीपदान और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। आज शुक्रवार होने के कारण माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का स्मरण करें। ध्यान रखें कि धनतेरस की पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए प्रदोष काल और पूजा समय का ध्यान रखें।

धनतेरस पर खरीदारी का क्या है महत्व?
धनतेरस के दिन खरीदारी करना शुभ परंपरा माना जाता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, पीतल, तांबा और स्टील के बर्तन खरीदते हैं। इसके अलावा वाहन, आभूषण और घर के लिए जरूरी सामान खरीदने की भी परंपरा है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक होती हैं। हालांकि, खरीदारी करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और जरूरत का ध्यान रखना चाहिए। किसी भी प्रकार का अनावश्यक कर्ज लेकर खरीदारी करना जरूरी नहीं है।

आज का राहुकाल (Rahu Kaal Today)
हिंदू पंचांग में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इस अवधि में नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है। हालांकि, रोजमर्रा के जरूरी काम और पहले से चल रहे कार्य किए जा सकते हैं। राहुकाल का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार निर्धारित होता है। इसलिए 6 नवंबर 2026 के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में शुक्रवार का राहुकाल अवश्य देखें। विशेष रूप से पूजा, खरीदारी और किसी नए कार्य की शुरुआत के लिए शुभ समय का चयन करना बेहतर रहेगा।

आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त: धनतेरस पर प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। खरीदारी के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ चौघड़िया और मुहूर्त का ध्यान रखें।
राहुकाल: शुक्रवार का राहुकाल स्थानीय सूर्योदय के आधार पर निर्धारित होगा।
यमगण्ड: इसका समय भी स्थान के अनुसार बदलता है।
गुलिक काल: शुक्रवार के दिन इसका समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखें।
अभिजीत मुहूर्त: इसका सटीक समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर निर्धारित होता है।

शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
आज धनतेरस के साथ शुक्र प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं तथा शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करते हैं। आज धनतेरस और शुक्र प्रदोष का एक साथ होना इस दिन को और भी विशेष बना रहा है। श्रद्धालु भगवान शिव, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करके परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर सकते हैं।

धनतेरस पर जरूर करें ये धार्मिक कार्य
धनतेरस के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। भगवान धन्वंतरि की पूजा करके आरोग्य की कामना करें। माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का स्मरण करें। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। मान्यता के अनुसार, इस दिन यमदीपदान करने की भी परंपरा है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

इस लेख में दी गई पंचांग और धार्मिक जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, राहुकाल, शुभ मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग-अलग शहरों में बदल सकता है। पूजा और खरीदारी के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।


