By: Vikash Kumar (Vicky)

हिंदू पंचांग में अश्विन महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण से लेकर मां दुर्गा की आराधना तक कई प्रमुख धार्मिक पर्व और व्रत आते हैं। साल 2026 में अश्विन माह की शुरुआत 27 सितंबर से हो रही है। खास बात यह है कि अश्विन महीने की शुरुआत पितृ पक्ष से होगी और इसी दौरान पितरों को समर्पित श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। इसके बाद शारदीय नवरात्रि और विजयदशमी जैसे प्रमुख पर्व भी मनाए जाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अश्विन महीने में पूजा-पाठ, व्रत, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। आइए जानते हैं 2026 में अश्विन महीने की शुरुआत कब होगी और इस दौरान कौन-कौन से प्रमुख व्रत-त्योहार पड़ेंगे।

कब से शुरू हो रहा है अश्विन महीना?
साल 2026 में अश्विन महीना 27 सितंबर से शुरू होगा। इस महीने की शुरुआत पितृ पक्ष के साथ होने के कारण धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व और बढ़ जाता है। पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि करते हैं।
अश्विन माह में ही पितृ पक्ष की समाप्ति के बाद नवरात्रि का शुभ आरंभ होता है। मां दुर्गा की आराधना का यह पर्व पूरे देश में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

पितृ पक्ष 2026 में कब से कब तक?
अश्विन महीने की शुरुआत पितृ पक्ष से होगी। साल 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
पितृ पक्ष में प्रत्येक दिन का अपना अलग महत्व माना जाता है। जिस तिथि को किसी व्यक्ति के पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है। इसके अलावा सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन पितरों के लिए भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती।
इंदिरा एकादशी कब है?
अश्विन माह में पड़ने वाली प्रमुख एकादशियों में इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ रही है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। पितृ पक्ष के दौरान आने के कारण इस एकादशी को पितरों की शांति से भी जोड़कर देखा जाता है।
महालय अमावस्या 10 अक्टूबर को
10 अक्टूबर 2026, शनिवार को महालय अमावस्या होगी। इसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। पितृ पक्ष का समापन इसी दिन होता है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं होती, वे इस दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं।
महालय अमावस्या के बाद शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। इसलिए यह दिन पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी आराधना के नए पर्व की शुरुआत के बीच महत्वपूर्ण माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि और घटस्थापना
पितृ पक्ष की समाप्ति के अगले दिन यानी 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शारदीय नवरात्रि का शुभ आरंभ होगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हैं और सुबह-शाम देवी की आरती करते हैं। घरों और मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा का महत्व
शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इन नौ दिनों में मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान देवी की आराधना करने से भक्तों को शक्ति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है।

नवरात्रि के दौरान कई लोग सात्विक भोजन करते हैं और व्रत रखते हैं। जगह-जगह दुर्गा पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विजयदशमी 2026 कब है?
शारदीय नवरात्रि के समापन के बाद विजयदशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। साल 2026 में विजयदशमी पूजा 20 अक्टूबर को होगी।
विजयदशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की कथा से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं। कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

पापांकुशा एकादशी कब है?
अश्विन महीने में शारदीय नवरात्रि और विजयदशमी के बाद पापांकुशा एकादशी आती है। साल 2026 में पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर, बुधवार को होगी।
यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत आत्मसंयम और भगवान विष्णु की भक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अश्विन माह में दान-पुण्य का महत्व
अश्विन महीने में दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। नवरात्रि के दौरान भी भक्त कन्या पूजन और दान-पुण्य करते हैं।
हालांकि दान हमेशा अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार करना चाहिए। किसी भी धार्मिक कार्य को लेकर अनावश्यक आर्थिक दबाव लेने की जरूरत नहीं है।
अश्विन माह 2026 के प्रमुख व्रत-त्योहार एक नजर में
27 सितंबर 2026: पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष की शुरुआत
6 अक्टूबर 2026, मंगलवार: इंदिरा एकादशी
10 अक्टूबर 2026, शनिवार: महालय अमावस्या और पितृ पक्ष का समापन
11 अक्टूबर 2026, रविवार: शारदीय नवरात्रि और घटस्थापना
20 अक्टूबर 2026: विजयदशमी पूजा

21 अक्टूबर 2026, बुधवार: पापांकुशा एकादशी
क्यों खास है अश्विन महीना?
अश्विन माह में एक ओर जहां पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर मिलता है, वहीं दूसरी ओर नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना की जाती है। यही वजह है कि धार्मिक कैलेंडर में इस महीने को विशेष महत्व दिया जाता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण के बाद देवी आराधना का पर्व शुरू होना भी इस महीने को धार्मिक रूप से खास बनाता है। इसके बाद विजयदशमी का पर्व आता है, जो धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष में धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। अलग-अलग पंचांग, स्थान और परंपरा के अनुसार तिथियों और पूजा के समय में अंतर हो सकता है। किसी विशेष व्रत, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग अथवा योग्य विद्वान से पुष्टि करना उचित है।
