By: Vikash Kumar (Vicky)

सिमडेगा। सिमडेगा की पहचान लंबे समय से हॉकी की नर्सरी के रूप में रही है। यहां की मिट्टी ने देश को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। लेकिन अब इस पहचान के साथ एक और कहानी जुड़ रही है। यह कहानी है हौसले की, आत्मविश्वास की और उस बेटी की, जिसने सिमडेगा की पहचान को हॉकी के मैदान से उठाकर देश के सबसे लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के मंच तक पहुंचाया।

सिमडेगा शहर के ठाकुरटोली निवासी रेशमा लकड़ा जब मुंबई में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने खड़ी हुईं तो उनके साथ केवल उनका ज्ञान और आत्मविश्वास नहीं था, बल्कि उनके पीछे खड़ा था पूरा सिमडेगा। KBC के 31वें एपिसोड में शामिल हुईं रेशमा ने जिस अंदाज में अपना परिचय दिया, उसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। उन्होंने आत्मविश्वास से कहा- “सिमडेगा की मैं छोरी हूं, सब पर भारी पड़ूंगी। हॉट सीट पर बैठकर झारखंड का नाम बढ़ाऊंगी।” उनके इस अंदाज पर तालियों की गूंज सुनाई दी।

रेशमा के लिए KBC तक पहुंचने की कहानी भी किसी छोटे सफर की नहीं है। सामाजिक वानिकी विभाग में प्रधान वन रक्षी के पद पर कार्यरत रेशमा ने अपनी स्कूली शिक्षा संत जोंस स्कूल फरसाबेड़ा से पूरी की और इसके बाद सिमडेगा कॉलेज से अंग्रेजी ऑनर्स की पढ़ाई की। सरकारी नौकरी के साथ ज्ञान और सामान्य जानकारी में अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने KBC के सफर की शुरुआत की।
चयन की प्रक्रिया में रेशमा को 20 मई को लखनऊ में ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। वहां उनसे कई सवाल पूछे गए। ऑडिशन के बाद रक्षाबंधन के दिन उनके पास KBC से फोन आया और मुंबई आने की सूचना मिली। इसके बाद वह अपने पति गौरव बेक के साथ नौ सितंबर को मुंबई पहुंचीं। 10 और 12 सितंबर को उन्होंने KBC के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

मुंबई का वह स्टूडियो रेशमा के लिए सिर्फ एक टीवी कार्यक्रम का सेट नहीं था। वह उनके लिए अपने जिले को देश के सामने रखने का अवसर था। महानायक अमिताभ बच्चन के सामने जब सिमडेगा का नाम आया तो रेशमा ने अपने जिले की पहचान को पूरे आत्मविश्वास के साथ सामने रखा।
अमिताभ बच्चन ने जब उनसे पूछा कि सिमडेगा कहां है और उसकी पहचान क्या है, तो रेशमा ने बताया कि सिमडेगा झारखंड का एक छोटा आदिवासी बहुल जिला है और इसे हॉकी की नर्सरी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सिमडेगा की हॉकी प्रतिभाओं का जिक्र करते हुए भारतीय हॉकी की स्टार खिलाड़ी सलीमा टेटे का नाम भी लिया। सलीमा टेटे का नाम सामने आते ही कार्यक्रम में तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी।
रेशमा भले ही हॉट सीट तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन KBC के मंच पर उनकी मौजूदगी अपने आप में सिमडेगा के लिए चर्चा का विषय बन गई। 31वें एपिसोड में रेशमा का मुकाबला नोएडा के प्रशांत कुमार से हुआ, जिसमें प्रशांत कुमार ने जीत हासिल कर हॉट सीट पर जगह बनाई। रेशमा की यात्रा वहीं समाप्त हुई, लेकिन उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

क्योंकि किसी बड़े मंच पर पहुंचना केवल जीत और हार के आंकड़ों से नहीं मापा जाता। कई बार किसी छोटे शहर या जिले की आवाज को देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचा देना भी अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि बन जाता है। रेशमा ने यही किया। उन्होंने KBC के मंच पर सिमडेगा की बात की, उसकी हॉकी पहचान बताई और यह दिखाया कि छोटे शहरों से आने वाली बेटियों के सपनों की उड़ान किसी बड़े शहर की सीमाओं की मोहताज नहीं है।
सिमडेगा की कहानी भी धीरे-धीरे बदल रही है। कभी जिस जिले की चर्चा मुख्य रूप से हॉकी को लेकर होती थी, आज वहां की प्रतिभाएं शिक्षा, सरकारी सेवा, खेल और राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर अपनी पहचान बना रही हैं। रेशमा लकड़ा इसी बदलते सिमडेगा की एक तस्वीर हैं।

उनकी कहानी में एक खास बात यह भी है कि उन्होंने अपने सफर में अपनी जड़ों को कभी पीछे नहीं छोड़ा। मुंबई के चमकदार स्टूडियो में अमिताभ बच्चन के सामने खड़े होकर भी उनके शब्दों में सिमडेगा की मिट्टी की खुशबू थी। उन्होंने अपनी पहचान को छिपाने के बजाय उसे गर्व के साथ सामने रखा। यही वजह है कि KBC में उनकी मौजूदगी सिमडेगा के लोगों के लिए भावनात्मक जुड़ाव का विषय बन गई।
रेशमा के पति गौरव बेक भी इस सफर में उनके साथ रहे। दोनों मुंबई पहुंचे और KBC के सेट पर इस यादगार अनुभव का हिस्सा बने। रेशमा ने अमिताभ बच्चन के व्यवहार को भी बेहद सहज और संवेदनशील बताया। उनके अनुसार, स्क्रीन पर जिस तरह अमिताभ बच्चन हंसी-मजाक करते दिखाई देते हैं, वास्तविक जीवन में भी उनका अंदाज काफी सहज है।

सिमडेगा की इस बेटी की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जो छोटे शहरों और सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। रेशमा की यात्रा यह बताती है कि अवसर मिलने पर प्रतिभा अपनी पहचान बनाने के लिए रास्ता खुद तलाश सकती है।
सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह ने भी रेशमा लकड़ा की उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सिमडेगा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर कंचन सिंह को वर्तमान उपायुक्त के रूप में दर्ज किया गया है।

कहानी की शुरुआत सिमडेगा की उसी माटी से हुई थी, जहां सपने शायद बड़े शहरों की तरह चमकदार नहीं दिखते, लेकिन उन्हें पूरा करने का हौसला कम नहीं होता। हॉकी के मैदानों से लेकर KBC के स्टूडियो तक पहुंची रेशमा लकड़ा की यात्रा उसी हौसले की कहानी है।
आज सिमडेगा की पहचान सिर्फ हॉकी की नर्सरी तक सीमित नहीं दिखती। यहां की बेटियां अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। रेशमा ने KBC के मंच पर पहुंचकर यह साबित किया कि पहचान भले ही एक छोटे जिले से शुरू हो, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं होती।

माटी वही है, लेकिन उड़ान अब अनेक है। सिमडेगा की यह कहानी शायद आने वाले दिनों में ऐसी ही कई बेटियों की नई कहानियों की शुरुआत बनेगी।
