By: Vikash, Mala Mandal
बाबा मंदिर में अवैध दुकानों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट
देवघर: झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाबा बैद्यनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए मंदिर प्रांगण में संचालित अवैध दुकानों को हटा दिया है। इस कार्रवाई के तहत फूल-माला, पूजन सामग्री काउंटर, फोटो लैब एवं फोटोग्राफी से जुड़े कई छोटे व्यवसायों को हटाया गया, जिससे सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद प्रभावित लोगों में आक्रोश और निराशा दोनों देखने को मिल रही है। खासकर फोटो लैब संचालकों, कैमरामैन और छोटे दुकानदारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में इन व्यवसायों से प्रतिदिन 50,000 से अधिक लोगों का घर-परिवार चलता था।

सुरक्षा बनाम रोजगार का सवाल
जिला प्रशासन का मानना है कि मंदिर परिसर में बढ़ती भीड़ और सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई जरूरी थी। सावन माह और अन्य विशेष अवसरों पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर लगातार दबाव रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, इस कदम ने एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या सुरक्षा के नाम पर लोगों की रोजी-रोटी छीनना उचित है? प्रभावित लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां काम कर रहे थे और अचानक इस तरह हटाए जाने से उनके सामने जीवन-यापन का संकट उत्पन्न हो गया है।

महापौर से लगाई गुहार
अपनी समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में फोटो लैब संचालक, कैमरामैन और दुकानदार नगर निगम के महापौर रवि रावत के पास पहुंचे। उन्होंने महापौर को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी स्थिति से अवगत कराया और पुनः रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। इस दौरान कई लोगों ने भावुक होकर बताया कि उनके परिवार की पूरी निर्भरता इसी काम पर थी। एक फोटोग्राफर ने कहा, “हम पिछले कई वर्षों से यहां काम कर रहे थे। अचानक दुकान हट जाने से अब हमारे पास कोई आय का साधन नहीं बचा है।”

महापौर का आश्वासन
महापौर रवि रावत ने प्रभावित लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर जिला प्रशासन से वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी हो सकती है, लेकिन प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। महापौर ने कहा, “हम जिला प्रशासन से मिलकर ऐसा रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित न हो। जल्द ही सभी को फिर से रोजगार का अवसर मिल सके, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।”

पुनर्वास की मांग तेज
इस कार्रवाई के बाद अब प्रभावित व्यवसायियों द्वारा पुनर्वास की मांग तेज हो गई है। उनका कहना है कि यदि उन्हें मंदिर परिसर के बाहर या किसी निर्धारित स्थान पर दुकान लगाने की अनुमति दी जाए, तो वे अपनी आजीविका फिर से शुरू कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में प्रशासन को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। एक ओर जहां सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

प्रशासन के सामने चुनौती
जिला प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ मंदिर परिसर की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना, और दूसरी तरफ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करना। यदि समय रहते कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
बाबा मंदिर में अवैध दुकानों को हटाने की कार्रवाई ने जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम बढ़ाया है, वहीं हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट भी खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और नगर निगम पर टिकी हैं कि वे इस समस्या का समाधान कैसे निकालते हैं।

