By: Mala Mandal
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने 2026 बोर्ड परीक्षाओं की डिजिटल कॉपी जांच प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। बोर्ड ने साफ कहा है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए Coempt EduTeck को दिया गया ठेका पूरी तरह पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के तहत दिया गया है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कई छात्र संगठनों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा था कि CBSE ने बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन का काम जिस निजी कंपनी को सौंपा है, उसकी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद बोर्ड को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा।
CBSE ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि Coempt EduTeck का चयन सामान्य वित्तीय नियम यानी General Financial Rules (GFR) के अनुसार किया गया। बोर्ड के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और प्रतिस्पर्धात्मक थी, जिसमें सभी पात्र कंपनियों को भाग लेने का अवसर दिया गया।

बोर्ड ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने का मुख्य उद्देश्य कॉपियों की जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनाना है। इससे रिजल्ट जारी करने में लगने वाला समय कम होगा और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी घटेगी।
CBSE अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में लाखों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हर साल एक बड़ी चुनौती होती है। पारंपरिक व्यवस्था में कॉपियों के परिवहन, सुरक्षित भंडारण और मूल्यांकन में काफी समय लगता था। डिजिटल तकनीक के जरिए अब परीक्षकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कॉपियां उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित होगी।

हालांकि, छात्रों और अभिभावकों के एक वर्ग ने इस नई व्यवस्था पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान तकनीकी गड़बड़ियां छात्रों के अंकों को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ शिक्षकों ने भी यह आशंका जताई कि ऑनलाइन मूल्यांकन में नेटवर्क और सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
इन आशंकाओं पर जवाब देते हुए CBSE ने कहा कि नई प्रणाली को लागू करने से पहले कई स्तरों पर परीक्षण किए गए हैं। बोर्ड के अनुसार, डेटा सुरक्षा, मूल्यांकन की गोपनीयता और तकनीकी सहायता के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा परीक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही तरीके से उपयोग कर सकें।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि Coempt EduTeck केवल तकनीकी सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करेगी। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और अंतिम अंक देने का अधिकार केवल अधिकृत परीक्षकों और CBSE अधिकारियों के पास ही रहेगा। यानी कंपनी का काम सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की जरूरत है। कई राज्य बोर्ड और विश्वविद्यालय पहले से ही ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि कॉपियों के खोने या बदलने जैसी समस्याओं पर भी रोक लगती है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इतनी बड़ी परीक्षा प्रणाली में किसी भी नई तकनीक को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर निगरानी और परीक्षण जरूरी है। यदि तकनीकी व्यवस्था मजबूत नहीं हुई तो छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इस बीच विपक्षी दलों और कुछ छात्र संगठनों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बोर्ड को पूरी टेंडर प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश खत्म हो सके।
CBSE ने अपने बयान में कहा कि बोर्ड छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और परीक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। बोर्ड ने यह भी कहा कि यदि किसी को प्रक्रिया से संबंधित कोई सवाल है तो वह सूचना के अधिकार यानी RTI के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकता है।

गौरतलब है कि 2026 बोर्ड परीक्षाओं में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक तकनीकी और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को भी इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि CBSE की सफाई के बाद यह विवाद शांत होता है या फिर विपक्ष और छात्र संगठन इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहते हैं। फिलहाल बोर्ड ने साफ कर दिया है कि Coempt EduTeck को ठेका देने में सभी वित्तीय और प्रशासनिक नियमों का पालन किया गया है।

