By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
पश्चिम बंगाल में ईद की नमाज के आयोजन को लेकर इस बार बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने कई वर्षों से कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित होने वाली मुख्य ईद की नमाज को इस बार ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित करने का फैसला लिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

कोलकाता का रेड रोड लंबे समय से ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा की बड़ी नमाज का केंद्र रहा है। हर साल यहां हजारों की संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचते थे। लेकिन इस बार राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस ने आयोजन स्थल बदलने का निर्णय लेते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड को चुना है। प्रशासन का मानना है कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड अधिक खुला और बड़ा क्षेत्र है, जहां भीड़ को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान होगा।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने आयोजन समिति और धार्मिक संगठनों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया। अधिकारियों का कहना है कि रेड रोड पर ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा था। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों ने भी भीड़ नियंत्रण को लेकर नई व्यवस्था की सिफारिश की थी। ऐसे में ब्रिगेड परेड ग्राउंड को बेहतर विकल्प माना गया।

कोलकाता पुलिस ने ईद के मौके पर विशेष सुरक्षा इंतजाम करने की तैयारी शुरू कर दी है। शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए निगरानी रखी जाएगी। ट्रैफिक पुलिस ने भी नई रूट डायवर्जन योजना तैयार की है ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नमाजियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां पेयजल, मेडिकल टीम, पार्किंग और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग सुविधा केंद्र भी बनाए जाएंगे।

इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि रेड रोड की ऐतिहासिक परंपरा को अचानक बदलना उचित नहीं है। वहीं सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों से लिया गया है, इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं है।

धार्मिक संगठनों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ संगठनों ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि रेड रोड केवल एक स्थान नहीं बल्कि कोलकाता की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा बन चुका है।
स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों की राय भी अलग-अलग है। रेड रोड और आसपास के इलाकों में कारोबार करने वाले कई दुकानदारों का कहना है कि ईद के मौके पर यहां बड़ी संख्या में लोगों के आने से व्यापार को फायदा होता था। दूसरी ओर कुछ नागरिकों ने ट्रैफिक जाम और सुरक्षा समस्याओं को देखते हुए सरकार के फैसले को सही बताया।

ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार इतने बड़े स्तर पर ईद की नमाज आयोजित होने जा रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। कोलकाता नगर निगम भी सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए समय-समय पर स्थान और व्यवस्था में बदलाव करना प्रशासनिक जरूरत बन जाता है। हालांकि किसी भी ऐतिहासिक परंपरा में बदलाव लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा होता है, इसलिए सरकार को संवाद बनाए रखना जरूरी है।

ईद के अवसर पर राज्य सरकार ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने भी सभी नागरिकों को ईद की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि त्योहार आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक है। प्रशासन ने लोगों से सहयोग करने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाला यह पहला बड़ा ईद आयोजन कितना सफल रहता है। यदि व्यवस्था सुचारू रही तो आने वाले वर्षों में भी यह नया स्थल स्थायी विकल्प बन सकता है। फिलहाल कोलकाता में ईद की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और लोग त्योहार को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

