By: Mala Mandal
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च और प्रदर्शन के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया है कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए तैयार हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।

बीते कई दिनों से CJP अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रही थी। पार्टी का कहना था कि उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार नहीं कर रही है, जिसके विरोध में संस्थापक अभिजीत दिपके ने भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक भी उनके साथ जुड़े रहे।

इसी बीच पार्टी ने दिल्ली में ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया। इस मार्च में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा घेरा मजबूत किया। कुछ स्थानों पर हल्का बल प्रयोग किए जाने की भी चर्चा रही, जबकि प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि सरकार अब प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए तैयार हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से निकल सकता है।
सौरभ दास ने यह भी कहा कि अभिजीत दिपके ने सरकार की ओर से बातचीत की संभावना बनने के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार आंदोलन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है।

दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किए जाएं। वहीं प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों की बात भी सुनी जाए।

दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले ही व्यापक इंतजाम किए गए थे। संसद क्षेत्र और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। कई मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ, जिससे आम लोगों को कुछ समय के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आंदोलनों में संवाद सबसे प्रभावी रास्ता होता है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी आपसी बातचीत के जरिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती है और तनावपूर्ण स्थिति से भी बचा जा सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक वार्ता होती है और यदि होती है तो उसका क्या परिणाम निकलता है। पार्टी का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा। वहीं भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद अब आगे की रणनीति बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी।

दिल्ली में हुए ‘संसद चलो’ मार्च ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से किसी आधिकारिक बयान या वार्ता की पुष्टि होने पर इस पूरे मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।

