By: Mala Mandal
देवघर। साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अधीक्षक देवघर प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस उपाधीक्षक कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 3 अक्टूबर 2026 को की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन और आठ सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस की तकनीकी जांच में जब्त मोबाइल नंबरों और आईएमईआई नंबरों के विरुद्ध विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, देवघर जिले के सारठ थाना क्षेत्र में साइबर ठगी से जुड़े संदिग्धों के सक्रिय होने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की योजना बनाई और संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान पांच लोगों को साइबर अपराध करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड को पुलिस ने जांच के लिए जब्त कर लिया है।
फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर करते थे ठगी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी के लिए अपनाए जा रहे कई तरीकों का खुलासा हुआ है। आरोप है कि गिरफ्तार आरोपी खुद को फ्लिपकार्ट, अमेजन पे, एयरटेल पेमेंट बैंक, गूगल पे और फोनपे के कस्टमर केयर प्रतिनिधि अथवा अधिकारी बताकर आम लोगों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान वे ग्राहकों को विभिन्न तरह के ऑफर, कैशबैक या अन्य लाभ का झांसा देते थे। इसके बाद साइबर ठग लोगों से मोबाइल पर अलग-अलग प्रक्रिया पूरी करवाने की कोशिश करते थे। कई मामलों में कैशबैक के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने की बात सामने आई है। पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इनके संपर्क में कौन-कौन लोग हैं।

पीएम किसान के नाम पर भी ठगी का तरीका
साइबर अपराधियों द्वारा सरकारी योजनाओं का नाम इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा पीएम किसान योजना, बिजली बिल, आरटीओ चालान और आधार अपडेट के नाम पर भी लोगों को झांसा दिया जाता था। इसके लिए कथित तौर पर मोबाइल पर एपीके फाइल भेजी जाती थी। साइबर अपराधी लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि सरकारी योजना का लाभ लेने, बिजली बिल अपडेट करने, आरटीओ चालान से संबंधित जानकारी हासिल करने या आधार अपडेट कराने के लिए मोबाइल में भेजी गई फाइल को डाउनलोड करना जरूरी है। इसके बाद मोबाइल का एक्सेस हासिल कर साइबर ठगी करने की कोशिश की जाती थी। पुलिस ने आम लोगों से ऐसे किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड नहीं करने की अपील की है। साथ ही किसी भी व्यक्ति द्वारा फोन पर बैंकिंग, यूपीआई, ओटीपी या अन्य निजी जानकारी मांगे जाने पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पांच मोबाइल और आठ सिम कार्ड बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन और आठ सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जांच की जा रही है। जांच के दौरान मोबाइल नंबरों और आईएमईआई नंबरों के विरुद्ध विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है। इससे पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी का नेटवर्क केवल देवघर तक सीमित नहीं हो सकता है। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद मोबाइल और सिम कार्ड का इस्तेमाल किन-किन लोगों से संपर्क करने के लिए किया गया था और ठगी से जुड़े मामलों में इनकी क्या भूमिका रही है।

पूर्व में भी साइबर अपराध से जुड़े मामले
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ का पूर्व में भी साइबर अपराध से जुड़े मामलों में नाम सामने आ चुका है। पुलिस संबंधित कांडों और गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान यदि अन्य साइबर अपराधियों या नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। देवघर पुलिस की साइबर टीम लगातार तकनीकी इनपुट के आधार पर साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
देवघर पुलिस ने आम लोगों से साइबर ठगी को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर भरोसा कर बैंकिंग या निजी जानकारी साझा नहीं करें। कस्टमर केयर के नाम पर फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान और नंबर की पुष्टि किए बिना किसी तरह की जानकारी देने से बचें। इसी तरह किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, एपीके फाइल या मोबाइल एप को डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधी अलग-अलग सरकारी योजनाओं और नामी कंपनियों का सहारा लेकर लोगों को विश्वास में लेने की कोशिश करते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने और मामले की जांच में पुलिस को मदद मिल सकती है।
देवघर पुलिस के इस अभियान से साइबर अपराधियों के बीच हड़कंप की स्थिति है। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों से जुड़े मोबाइल, सिम कार्ड और तकनीकी साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है। जांच के बाद साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी सामने आने की संभावना है।


