By: Vikash Kumar (Vicky)
आपके दिए गए देवघर पुलिस के प्रेस नोट के आधार पर खबर तैयार की गई है। इसमें साइबर ठगी के तरीके, पुलिस की कार्रवाई, बरामद सामान और आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियों को शामिल किया गया है।
देवघर। साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि और विभिन्न डिजिटल भुगतान सेवाओं के अधिकारी बनकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी कैशबैक, गिफ्ट कार्ड, बैंकिंग सेवाओं और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

गूगल पे, फोनपे और पेटीएम के नाम पर बनाते थे शिकार
देवघर पुलिस की ओर से 16 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 15 अक्टूबर 2026 को साइबर अपराध में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पथरड्डा ओपी क्षेत्र के अंतर्गत जंगल में कुछ संदिग्ध साइबर अपराधी सक्रिय हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान तीन संदिग्धों को पकड़ने में सफलता मिली। तलाशी के दौरान उनके पास से तीन मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ऑनलाइन भुगतान से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निशाना बनाते थे। इसके लिए वे गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसी डिजिटल भुगतान सेवाओं के फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि अथवा संबंधित सेवाओं से जुड़े अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करते थे।
आरोपी लोगों को कैशबैक मिलने का लालच देते थे। इसके अलावा फोनपे गिफ्ट कार्ड बनाने और उसे रिडीम करने के नाम पर भी ठगी की जाती थी। डिजिटल भुगतान से जुड़ी सेवाओं की जानकारी कम रखने वाले लोगों को विश्वास में लेकर उनसे गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करना इस तरह की ठगी का प्रमुख तरीका बताया गया है।

एयरटेल पेमेंट बैंक के नाम पर भी ठगी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी एयरटेल पेमेंट बैंक से संबंधित सेवाओं का भी दुरुपयोग करते थे। आरोपी फर्जी एजेंट बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। एयरटेल थैंक्स ऐप के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने अथवा बैंक कार्ड अपडेट कराने के नाम पर लोगों को झांसा दिया जाता था।
इस दौरान आम लोगों को कैशबैक और अन्य सुविधाओं का लालच देकर उनके बैंकिंग खातों से संबंधित जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती थी। साइबर अपराधी जानते हैं कि बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वे इन्हीं सेवाओं के नाम का सहारा लेकर लोगों के बीच विश्वास कायम करते हैं और फिर ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं।
फर्जी कस्टमर केयर नंबरों के माध्यम से होने वाली ठगी में कई बार लोग स्वयं ही अनजान व्यक्तियों को फोन कर बैठते हैं। उन्हें लगता है कि वे संबंधित कंपनी के आधिकारिक प्रतिनिधि से बात कर रहे हैं। बातचीत के दौरान ठग कैशबैक, रिफंड, खाते को अपडेट करने या भुगतान की समस्या दूर करने का भरोसा दिलाते हैं। इसके बाद वे गोपनीय जानकारी हासिल करने अथवा डिजिटल भुगतान कराने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, इस मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और कथित ठगी से संबंधित विस्तृत वित्तीय लेन-देन की जानकारी पुलिस की आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रधानमंत्री किसान योजना और लोन के नाम पर भी लोगों को फंसाने की कोशिश
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और लोन दिलाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते थे। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने अथवा ऋण उपलब्ध कराने का भरोसा देकर लोगों से संपर्क करना साइबर ठगी का एक प्रचलित तरीका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग सरकारी योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और भुगतान की स्थिति जानने के लिए ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लेते हैं। साइबर अपराधी इसी जरूरत का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। वे स्वयं को योजना से जुड़ा कर्मचारी या अधिकृत प्रतिनिधि बताकर लोगों से बैंक खाते, मोबाइल नंबर और अन्य संवेदनशील जानकारियां मांग सकते हैं।
पुलिस के अनुसार, इस तरह के मामलों में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। किसी भी सरकारी योजना का लाभ दिलाने अथवा लोन स्वीकृत कराने के नाम पर अनजान व्यक्ति को बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी नहीं देनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान व्यक्ति के कहने पर डिजिटल भुगतान करने से भी बचना चाहिए।

साइबर अपराध का पुराना मामला भी आया सामने
पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक का नाम पहले से साइबर थाना देवघर के कांड संख्या 70/2023 में दर्ज है। इससे मामले की जांच में आरोपियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच के माध्यम से आरोपियों के संपर्कों, संभावित पीड़ितों और साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए तरीकों की जानकारी जुटा सकती है। डिजिटल उपकरणों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संदिग्धों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या इस गतिविधि में अन्य व्यक्तियों की भी संलिप्तता थी।

इस कार्रवाई में साइबर थाना देवघर के पुलिस अवर निरीक्षक संतोष कुमार मंडल के नेतृत्व में छापेमारी दल शामिल था। टीम में पथरड्डा ओपी की पुलिस भी शामिल रही। पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध अभियान जारी रखने की बात कही है।
फर्जी कस्टमर केयर से बचने के लिए बरतें सावधानी
साइबर ठगी से बचने के लिए आम लोगों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। गूगल पे, फोनपे, पेटीएम, एयरटेल पेमेंट बैंक या किसी अन्य बैंकिंग सेवा का कस्टमर केयर नंबर खोजते समय केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत ऐप पर उपलब्ध संपर्क विवरण का इस्तेमाल करें।

कैशबैक, गिफ्ट कार्ड, रिफंड या सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर फोन करने वाले अनजान लोगों पर तुरंत भरोसा न करें। अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, पासवर्ड अथवा बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। याद रखें कि यूपीआई पिन डालना सामान्यतः भुगतान करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, पैसे प्राप्त करने का नहीं।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो उसे बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है।

देवघर पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को मजबूती मिली है। हालांकि, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। फर्जी कस्टमर केयर, कैशबैक और सरकारी योजनाओं के नाम पर आने वाले संदिग्ध फोन कॉल से सतर्क रहकर ही साइबर ठगी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

