By: Vikash, Mala Mandal
देवघर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संघ यात्रा के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देवघर में आयोजित प्रबुद्ध जन गोष्ठी रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। आरएल सर्राफ उच्च विद्यालय मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्धजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम को लेकर शहर में पहले से ही उत्साह का माहौल था, जो आयोजन के दौरान स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन कर अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इसके पश्चात संघ गीत के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। आयोजन स्थल पर अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रांत शारीरिक प्रमुख कुणाल कुमार ने अपने संबोधन में संघ की कार्यप्रणाली, विचारधारा और समाज निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से “पंच परिवर्तन” के विषय पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज को सही दिशा देने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।

कुणाल कुमार ने पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख बिंदुओं—स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन—को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को अपनाना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय उत्पादों और संसाधनों को बढ़ावा देने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
नागरिक कर्तव्यों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केवल अधिकारों की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। जब नागरिक अपने दायित्वों को समझते हैं, तभी एक सशक्त और जिम्मेदार समाज का निर्माण संभव होता है।

पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। तेजी से बदलते पर्यावरणीय हालातों को देखते हुए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर जागरूक होना होगा और प्रकृति के संरक्षण में योगदान देना होगा।
सामाजिक समरसता को उन्होंने राष्ट्र की एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त भेदभाव और विभाजन को समाप्त कर सभी वर्गों को एक सूत्र में बांधना आवश्यक है। तभी एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण हो सकता है।

कुटुंब प्रबोधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि परिवार ही समाज की मूल इकाई है। यदि परिवार मजबूत होगा तो समाज भी मजबूत होगा। उन्होंने परिवार में संस्कार, संवाद और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय देश और संस्कृति के लिए स्वर्णिम अवसर का दौर है, लेकिन इस समय हमें सजग और संतुलित रहकर आगे बढ़ना होगा ताकि विकास के साथ-साथ हमारे मूल्यों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोकानंद झा ने शिक्षा और संस्कार के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का आधार भी है। विशिष्ट अतिथियों में डॉ मनीष राज और डॉ पूजा राय ने भी समाज में जागरूकता और सेवा की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इस अवसर पर लीलाबारानंद नाथ महाराज का आशीर्वचन भी प्राप्त हुआ, जिससे कार्यक्रम को आध्यात्मिक आयाम मिला। उनके संदेश ने उपस्थित लोगों को जीवन में नैतिकता और मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
गोष्ठी के दौरान राष्ट्र निर्माण, संगठन की भूमिका, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में सकारात्मक संवाद और जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनील कुमार गुप्ता ने की, जबकि संचालन नगर कार्यवाह डॉ आनंद वर्धन ने किया। आयोजन में पूर्व विधायक नारायण दास, पूर्व मंत्री राज पलिवार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और सामूहिक चिंतन को बढ़ावा देते हैं और राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

