By: Mala Mandal
देश में एक बार फिर कोविड-19 को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड के 8 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं। वहीं संक्रमण से 2 लोगों की मौत की खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सभी राज्यों को सतर्क रहने, अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और संदिग्ध मरीजों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आम लोगों से भी अपील की गई है कि यदि सर्दी, खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
विशेषज्ञों के अनुसार कोविड वायरस समय-समय पर अपना स्वरूप बदलता रहता है। ऐसे में संक्रमण के छोटे-छोटे मामले भी गंभीरता से लिए जाते हैं ताकि समय रहते संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सके। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी और जांच अभियान चला रही हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को ऑक्सीजन, आवश्यक दवाइयों, आईसीयू बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर तुरंत संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ समन्वय भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की उम्र अधिक है, जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करना चाहिए।

कोविड संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में बुखार, गले में खराश, खांसी, शरीर में दर्द, कमजोरी, स्वाद और गंध में कमी तथा सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियमित रूप से हाथ धोने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने और खांसते या छींकते समय मुंह एवं नाक को ढकने की सलाह दे रहे हैं। बंद कमरों की बजाय हवादार स्थानों पर रहने और अनावश्यक भीड़ से बचने की भी सलाह दी जा रही है।

सरकार का कहना है कि देश का स्वास्थ्य ढांचा पहले की तुलना में काफी मजबूत हो चुका है। महामारी के दौरान विकसित की गई व्यवस्थाएं अब भी उपलब्ध हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य तंत्र तैयार है। इसलिए लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों से भी सावधान रहने की अपील कर रहा है। किसी भी अपुष्ट संदेश या वीडियो को साझा करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे लोगों में अनावश्यक डर फैल सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और स्वच्छ जीवनशैली अपनाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है तो उसे अपनी नियमित दवाइयां समय पर लेते रहना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कोविड अब पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहते हैं। इसलिए सतर्कता और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं। यदि कोई व्यक्ति बीमार महसूस करता है तो उसे दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए।

देश में फिलहाल एक्टिव मामलों की संख्या सीमित है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। लगातार निगरानी, जांच और आवश्यक तैयारियों के जरिए संक्रमण को नियंत्रित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता का पालन करना, जरूरत पड़ने पर मास्क पहनना, हाथों को साफ रखना और बीमार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद कर सकता है।

कुल मिलाकर कोविड के 8 एक्टिव केस और 2 मौतों की खबर ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतना सबसे बेहतर उपाय है। यदि नागरिक स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे और अफवाहों से दूर रहेंगे तो किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

