By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले के लिए गर्व का क्षण उस समय आया, जब जिले के बलसरा गांव निवासी युवा कवि, साहित्यकार एवं शिक्षक रवि शंकर साह को बिहार के भागलपुर में आयोजित विशाल अंग शिखर सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘अंग गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। शिक्षा, हिंदी साहित्य और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए आयोजन समिति ने उन्हें इस सम्मान के लिए चयनित किया। सम्मान प्राप्त होने के बाद देवघर सहित झारखंड और देशभर के साहित्यकारों, शिक्षकों, पत्रकारों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

सोमवार को भागलपुर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित अंग शिखर सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बुद्धिजीवी उपस्थित थे। खचाखच भरे सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह के दौरान रवि शंकर साह को सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान डी.लिट्. उपाधि से विभूषित डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी, जो तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के तेज नारायण बनैली महाविद्यालय के इतिहास विभाग के वरीय सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष हैं, के करकमलों से प्रदान किया गया। समारोह के दौरान वक्ताओं ने रवि शंकर साह के साहित्यिक जीवन, हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

रवि शंकर साह वर्तमान में पेशे से शिक्षक हैं, लेकिन उनकी पहचान केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है। वे हिंदी साहित्य की दुनिया में एक सक्रिय और प्रतिष्ठित युवा साहित्यकार के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वर्षों से वे कविता, लेख, आलोचना और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य की निरंतर सेवा कर रहे हैं।
शिक्षण कार्य के साथ-साथ उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कई वर्षों तक विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता के अनुभव ने उनके लेखन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का कार्य किया, जिसके कारण उनकी रचनाओं में समाज की वास्तविक समस्याओं, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।

रवि शंकर साह राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्था ‘साहित्य समागम भारत’ के संस्थापक भी हैं। इस संस्था के माध्यम से वे देशभर के साहित्यकारों, युवा रचनाकारों और हिंदी प्रेमियों को एक मंच उपलब्ध करा रहे हैं। संस्था समय-समय पर साहित्यिक गोष्ठी, कविता पाठ, सम्मान समारोह और विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है, जिससे हिंदी साहित्य को नई ऊर्जा मिल रही है।

उनका चर्चित काव्य संग्रह ‘धूल भरी चांदनी’ साहित्य जगत में काफी सराहा गया है। इसके अलावा उन्होंने कई साझा काव्य संग्रहों का सफल संपादन भी किया है। उनकी साहित्यिक कृतियों में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाएं, ग्रामीण जीवन, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।
रवि शंकर साह की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह भी रही कि उनकी पुस्तक का विमोचन झारखंड विधानसभा में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष के करकमलों से हुआ था। यह उपलब्धि उनके साहित्यिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल मानी जाती है।

साहित्य के प्रति उनके समर्पण और निरंतर सक्रियता के कारण उन्हें पूर्व में भी अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें महाकवि नीरज सम्मान (विश्व हिंदी रचनाकार मंच), डोमन साहू समीर स्मृति युवा सम्मान (झारखंड साहित्य अकादमी संघर्ष समिति), दानवीर कर्ण सम्मान, रविन्द्र चन्द्र भौमिक स्मृति साहित्य भूषण सम्मान (पश्चिम बंगाल), गुरु बृहस्पति सम्मान (साहित्य संगम संस्थान, नई दिल्ली), भगवती देवी स्मृति सम्मान (खोरठा भाषा साहित्य सृजन मंच, देवघर), सविता देवी स्मृति सम्मान तथा विद्यावाचस्पति सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सम्मान शामिल हैं।

अंग गौरव सम्मान मिलने के बाद साहित्यकारों ने कहा कि यह सम्मान केवल रवि शंकर साह का नहीं, बल्कि देवघर और झारखंड की साहित्यिक परंपरा का भी सम्मान है। उनकी उपलब्धि आने वाली युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और हिंदी साहित्य के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ाएगी।

देवघर के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और साहित्य प्रेमियों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रवि शंकर साह ने अपने निरंतर परिश्रम, साहित्य साधना और सामाजिक प्रतिबद्धता के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वे अपनी लेखनी से समाज और हिंदी साहित्य को नई दिशा देने का कार्य करते रहेंगे।

भागलपुर में मिला ‘अंग गौरव सम्मान’ निश्चित रूप से रवि शंकर साह के साहित्यिक जीवन की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान उनके वर्षों की साहित्य साधना, शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उनकी इस उपलब्धि से देवघर जिले का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।

