By: Mala Mandal
कोलकाता, 28 अप्रैल 2026 — पूर्वी रेलवे द्वारा चलाया जा रहा माहव्यापी स्वच्छता अभियान “एक कदम स्वच्छता की ओर” अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। 15 अप्रैल से शुरू होकर 14 मई तक चलने वाला यह अभियान न सिर्फ रेलवे परिसरों को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में काम कर रहा है, बल्कि लोगों के मन में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जागृत कर रहा है।

इस अभियान का नेतृत्व पूर्वी रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउसकर कर रहे हैं, जिनके मार्गदर्शन में रेलवे के सभी मंडल—सियालदह, हावड़ा, आसनसोल और मालदा—एकजुट होकर काम कर रहे हैं। मंडल रेल प्रबंधक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं, जबकि पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (EnHM) विभाग सहित अन्य इकाइयां भी सक्रिय सहयोग दे रही हैं।
अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल रेलवे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के हजारों स्वयंसेवक इस मुहिम की रीढ़ बने हुए हैं। ये स्वयंसेवक न केवल स्टेशन और पटरियों की सफाई कर रहे हैं, बल्कि यात्रियों को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

27 और 28 अप्रैल को इस अभियान ने विशेष गति पकड़ी। सियालदह मंडल के बैरकपुर समूह ने बैरकपुर हनुमान मंदिर और स्थानीय स्टेशन परिसर में स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया। यहां लोगों को स्वच्छता के महत्व और नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित किया गया। वहीं, विवेकानंद समूह के आठ सदस्यों ने बी.बी.डी. बाग रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ट्रैक को साफ रखने के लिए जागरूक किया।
इसी क्रम में बारासात और नैहाटी समूहों ने भी व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। नैहाटी समूह की पहल विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जहां स्वयंसेवकों ने चलती ट्रेनों में यात्रियों के बीच जाकर स्वच्छता का संदेश दिया। इस तरह यह अभियान प्लेटफॉर्म तक सीमित न रहकर सीधे यात्रियों के बीच पहुंचा।

कांचरापाड़ा जिला संघ ने भी इस अभियान को नई दिशा दी है। दक्षिण समूह के 55 सदस्यों ने कांचरापाड़ा वर्कशॉप क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया और प्लास्टिक कचरे का पृथक्करण किया। इसके बाद गाइड्स द्वारा रेलवे सुरक्षा और स्वच्छता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
ऑफिसर्स कॉलोनी समूह ने भी 46 सदस्यों और दो यूनिट लीडरों के साथ इस अभियान में भाग लिया। उन्होंने स्वच्छता को रचनात्मक रूप देने के लिए पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की। रोवर्स और रेंजर्स ने अपनी कला के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। कल्याणी प्लेटफॉर्म पर व्यंग्यात्मक नुक्कड़ नाटक के जरिए थूकने और गंदगी फैलाने के दुष्प्रभावों को प्रभावी तरीके से दर्शाया गया।

अभियान का एक और अनोखा उदाहरण चित्तरंजन और मधुपुर जंक्शन के बीच देखने को मिला, जहां ट्रेन संख्या 63509 के स्वयंसेवकों ने डिब्बों को एक चलती-फिरती कक्षा में बदल दिया। उन्होंने यात्रियों को “स्वच्छ भारत, हरित भारत” के संदेश से जोड़ते हुए बताया कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक आदत होनी चाहिए।
यह पहल पूरी तरह से यात्रियों के हित को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। स्वच्छ स्टेशन और साफ कोच न केवल यात्रा को सुखद बनाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक हैं। रेलवे प्रशासन का मानना है कि अत्याधुनिक सफाई व्यवस्था के बावजूद यदि यात्री सहयोग नहीं करेंगे, तो यह प्रयास अधूरा रह जाएगा।

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि “स्वच्छ रेल” का सपना तभी साकार होगा, जब हर यात्री इसे अपनी जिम्मेदारी समझे। कूड़ेदानोंç का उपयोग, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।
इस अभियान की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि यह सिर्फ रेलवे का अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि महाप्रबंधक मिलिंद देउसकर के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारी और स्काउट्स एवं गाइड्स लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता आम जनता की भागीदारी पर निर्भर करती है।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रेलवे केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। इसे स्वच्छ और व्यवस्थित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। सामूहिक प्रयास और जागरूकता के माध्यम से ही रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, पूर्वी रेलवे का यह स्वच्छता अभियान एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है। यह न केवल सफाई की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज को एकजुट करने और जिम्मेदारी का एहसास कराने का भी माध्यम बन रहा है। आने वाले दिनों में यह अभियान और अधिक प्रभावी होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

