By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
रांची: हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड मंत्रालय में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने, राहत प्रक्रिया को सरल बनाने और पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। इस दौरान विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई और कई योजनाओं को मंजूरी दी गई।

बैठक में सबसे अहम निर्णय सड़क दुर्घटनाओं में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को लेकर लिया गया। अब राज्य में सड़क हादसों में मृत्यु होने पर आश्रितों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इससे पहले यह राशि मात्र 1 लाख रुपये थी। इस फैसले से हजारों परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है और यह राज्य सरकार की संवेदनशील पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इसके साथ ही बैठक में अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर सहमति बनी। अब मृतक के आश्रितों को उनके गृह जिले के उपायुक्त द्वारा घटना का सत्यापन कराने के बाद सीधे सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इससे पहले कई मामलों में प्रक्रिया जटिल होने के कारण पीड़ित परिवारों को राहत मिलने में देरी होती थी। नए निर्णय से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सहायता राशि समय पर और सही लाभुक तक पहुंचे।
बैठक में अनुग्रह राशि के दोहरे भुगतान को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। अब यह तय किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति राज्य या केंद्र सरकार की बीमा योजना के अंतर्गत कवर है, तो उसके आश्रितों को या तो बीमा राशि मिलेगी या आपदा प्रबंधन के तहत अनुग्रह अनुदान—दोनों का लाभ एक साथ नहीं मिलेगा। इस निर्णय से वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगेगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

इसके अलावा “अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम (ODMP)” के तहत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार में कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारियों और जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों की सेवा अवधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने की स्वीकृति दी गई। यह निर्णय आपदा प्रबंधन तंत्र को स्थिर और प्रभावी बनाए रखने के लिए लिया गया है, ताकि प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मियों की सेवाएं लगातार मिलती रहें।

बैठक में “युवा आपदा मित्र” योजना को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। वर्तमान में यह योजना दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में लागू है। सरकार ने इस योजना से जुड़े स्वयंसेवकों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने और उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) से जोड़ने का फैसला किया है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में इन स्वयंसेवकों की सेवाएं तुरंत ली जा सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने इस योजना के तहत कार्य करने वाले युवाओं के लिए एक स्पष्ट SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्हें सेवा के दौरान प्रोत्साहन राशि या भत्ता देने के प्रस्ताव पर भी काम करने को कहा गया है। इससे युवाओं की भागीदारी और अधिक बढ़ेगी और आपदा के समय बेहतर प्रतिक्रिया मिल सकेगी।

राज्य में डूबने से होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बैठक में विशेष चिंता व्यक्त की गई। इस दिशा में 48 गोताखोरों को चिन्हित कर उन्हें प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने गोताखोरों की संख्या बढ़ाने और इस कार्य में पुलिस जवानों, गृहरक्षकों के साथ-साथ महिलाओं को भी शामिल करने का निर्देश दिया। इससे बचाव कार्यों में विविधता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य सरकार लगातार सुधार की दिशा में काम कर रही है। नई तकनीकों के उपयोग, मानव संसाधन के विकास और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर राज्य को आपदा के प्रति अधिक सक्षम और तैयार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, सचिव प्रशांत कुमार और सचिव विप्रा भाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित सुझाव दिए और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।
कुल मिलाकर, यह बैठक राज्य के आपदा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने और पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। सरकार के इन फैसलों से न केवल आपदा से प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में आपदा प्रबंधन प्रणाली भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

