By: Vikash Kumar (Vicky)

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के शोषण से जुड़े कथित विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने इस गंभीर मामले में Meta को समन जारी करते हुए जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण या उनसे जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों का प्रसार हुआ है, तो संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों और बच्चों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों में भी इजाफा देखा गया है। ऐसे में सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्लेटफॉर्म को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन और कंटेंट सामने आने की बात कही गई है जो बच्चों के शोषण से जुड़े होने का संदेह पैदा करते हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सरकारी एजेंसियों ने Meta से जवाब मांगा है। सरकार जानना चाहती है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचे और उन्हें रोकने के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाए।
सरकार ने यह भी पूछा है कि कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन की जांच और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Meta की वर्तमान नीति क्या है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे।
Meta को भेजा गया समन
सूत्रों के अनुसार, Meta के अधिकारियों को समन भेजकर संबंधित एजेंसियों के सामने उपस्थित होने और पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि कहीं एल्गोरिद्म, विज्ञापन प्रणाली या किसी अन्य तकनीकी खामी के कारण इस तरह का कंटेंट उपयोगकर्ताओं तक तो नहीं पहुंचा।

यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो कंपनी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानून और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार लगातार यह कहती रही है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वहां अवैध, आपत्तिजनक और बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट उपलब्ध न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और मानव समीक्षा जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना होगा।

सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करोड़ों लोग सक्रिय रहते हैं। ऐसे में कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने विज्ञापन सिस्टम और कंटेंट मॉडरेशन को प्रभावी बनाए रखें। यदि किसी प्रकार का अवैध या संवेदनशील कंटेंट सामने आता है तो उसे तुरंत हटाया जाए और संबंधित एजेंसियों को जानकारी दी जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रिपोर्ट मिलने का इंतजार करने के बजाय कंपनियों को सक्रिय निगरानी तंत्र विकसित करना चाहिए ताकि ऐसे मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

सख्त कानून और नियम
भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर कई कानून लागू हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, पॉक्सो कानून और अन्य कानूनी प्रावधान बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करते हैं।
सरकार समय-समय पर सोशल मीडिया कंपनियों को दिशा-निर्देश भी जारी करती रही है कि वे अवैध कंटेंट को समय पर हटाएं और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करें।

अभिभावकों की भी अहम भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, अजनबियों से बातचीत के जोखिम और संदिग्ध लिंक या विज्ञापनों से बचने के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि माता-पिता बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट में उपलब्ध सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का उपयोग करें।

आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर Meta के जवाब और सरकारी जांच पर टिकी है। यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो सरकार कंपनी के खिलाफ कड़े कदम उठा सकती है। वहीं यदि तकनीकी खामी या किसी अन्य कारण का पता चलता है तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच की रिपोर्ट और Meta के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

इंस्टाग्राम पर बच्चों के शोषण से जुड़े कथित विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार का Meta को समन भेजना यह दर्शाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार अब और अधिक सख्त रुख अपना रही है। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि यदि उनके प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से समझौता होता है तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार, तकनीकी कंपनियों और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही इंटरनेट को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
