By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
बच्चों के जन्म के बाद माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक समय पर उनका वैक्सीनेशन करवाना है। जन्म के बाद से ही बच्चे को अलग-अलग उम्र और समय के अनुसार कई जरूरी टीके लगाए जाते हैं, ताकि उसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सके। लेकिन जब माता-पिता वैक्सीनेशन के लिए सरकारी और प्राइवेट अस्पताल का विकल्प देखते हैं तो अक्सर उनके मन में एक सवाल जरूर आता है कि सरकारी अस्पताल में कुछ टीके मुफ्त या कम कीमत में लगाए जाते हैं, जबकि प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन की संख्या या कीमत अधिक क्यों दिखाई देती है? कई माता-पिता यह भी सोचते हैं कि क्या प्राइवेट अस्पताल में लगाए जाने वाले ज्यादा टीके सरकारी अस्पताल के टीकों से बेहतर होते हैं? क्या सरकारी अस्पताल में वैक्सीनेशन करवाना सुरक्षित है? बच्चे के लिए कौन-सा विकल्प चुना जाना चाहिए? इन सवालों को समझने के लिए वैक्सीनेशन के सरकारी कार्यक्रम और प्राइवेट वैक्सीनेशन के बीच अंतर जानना जरूरी है।

बच्चे के जन्म के बाद वैक्सीनेशन क्यों जरूरी है?
बच्चे का इम्यून सिस्टम जन्म के बाद धीरे-धीरे विकसित होता है। इस दौरान वह कई तरह के संक्रमणों के प्रति संवेदनशील हो सकता है। वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को किसी बीमारी के खिलाफ सुरक्षा विकसित करने के लिए तैयार करती है। जन्म के बाद निर्धारित समय पर टीके लगवाने से बच्चे को कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि बच्चों के लिए वैक्सीनेशन को स्वास्थ्य देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

सरकारी अस्पताल में कम टीके क्यों दिखाई देते हैं?
भारत में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों का वैक्सीनेशन मुख्य रूप से राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत किया जाता है। इस कार्यक्रम में सरकार द्वारा निर्धारित उम्र के अनुसार जरूरी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाती हैं। इन टीकों को सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिया जाता है। इसलिए सरकारी अस्पताल में माता-पिता को कई जरूरी टीके मुफ्त मिल सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकारी अस्पताल में बच्चे को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी जा रही है। सरकारी कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के बच्चों तक आवश्यक टीकाकरण पहुंचाना है।

प्राइवेट अस्पताल में ज्यादा टीके क्यों लगाए जाते हैं?
प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीनेशन का शेड्यूल कई बार सरकारी कार्यक्रम से अधिक व्यापक हो सकता है। प्राइवेट सेक्टर में कुछ ऐसे वैक्सीन विकल्प भी उपलब्ध होते हैं जिन्हें सरकारी राष्ट्रीय कार्यक्रम में नियमित रूप से शामिल नहीं किया गया है या जिनकी उपलब्धता सरकारी केंद्र पर नहीं होती। इसके अलावा कुछ वैक्सीन के अलग-अलग ब्रांड, कॉम्बिनेशन वैक्सीन या अतिरिक्त डोज प्राइवेट अस्पताल में उपलब्ध हो सकते हैं। इसी वजह से माता-पिता को प्राइवेट अस्पताल की वैक्सीनेशन सूची लंबी दिखाई दे सकती है।

क्या ज्यादा टीके का मतलब ज्यादा सुरक्षा है?
यह जरूरी नहीं है कि टीकों की संख्या अधिक होने का मतलब बच्चे के लिए हर स्थिति में अधिक सुरक्षा हो। वैक्सीनेशन का सही मूल्यांकन बच्चे की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, डॉक्टर की सलाह और उपलब्ध वैक्सीन के आधार पर किया जाता है। कुछ वैक्सीन एक ही इंजेक्शन में कई बीमारियों से सुरक्षा देने के लिए कॉम्बिनेशन के रूप में भी दी जाती हैं। इसलिए केवल इंजेक्शन की संख्या देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सा वैक्सीनेशन बेहतर है।

सरकारी अस्पताल में वैक्सीनेशन करवाना सुरक्षित है?
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध वैक्सीन निर्धारित सरकारी कार्यक्रम और वैक्सीन सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं के अनुसार दी जाती हैं। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी बच्चे को निर्धारित वैक्सीन और डोज देते हैं। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे का टीकाकरण कार्ड सुरक्षित रखा जाए और हर वैक्सीन की तारीख उसमें दर्ज हो। यदि कोई डोज छूट गई है तो स्वास्थ्यकर्मी या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर आगे का शेड्यूल पूरा किया जा सकता है।

प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीनेशन कराने के क्या फायदे हो सकते हैं?
प्राइवेट अस्पतालों में माता-पिता को वैक्सीन के अधिक विकल्प मिल सकते हैं। कई जगह अपॉइंटमेंट की सुविधा, डॉक्टर से विस्तृत सलाह और बच्चे के लिए व्यक्तिगत वैक्सीनेशन प्लान भी उपलब्ध होता है।कुछ माता-पिता सुविधा और समय बचाने के लिए प्राइवेट अस्पताल को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि प्राइवेट वैक्सीनेशन की लागत अस्पताल, वैक्सीन के ब्रांड और दिए जाने वाले टीकों के आधार पर काफी अलग हो सकती है।
सरकारी या प्राइवेट, वैक्सीनेशन कहां करवाना चाहिए?
बच्चे का वैक्सीनेशन सरकारी या प्राइवेट, दोनों तरह के स्वास्थ्य केंद्रों पर कराया जा सकता है, बशर्ते वहां वैक्सीनेशन निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार किया जा रहा हो और वैक्सीन की उचित स्टोरेज तथा हैंडलिंग सुनिश्चित हो। यदि परिवार आर्थिक रूप से सरकारी अस्पताल की सुविधा लेना चाहता है तो सरकारी टीकाकरण केंद्र एक महत्वपूर्ण विकल्प है। वहीं यदि माता-पिता डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त या वैकल्पिक वैक्सीन लेना चाहते हैं तो प्राइवेट अस्पताल का विकल्प चुना जा सकता है। सबसे जरूरी है कि कोई भी जरूरी वैक्सीन केवल इस वजह से न छूटे कि माता-पिता सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में से किसी एक विकल्प को लेकर असमंजस में हैं।

टीकाकरण कार्ड को हमेशा संभालकर रखें
बच्चे के जन्म के बाद मिलने वाला टीकाकरण कार्ड बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें बच्चे को दी गई वैक्सीन, डोज और तारीख की जानकारी दर्ज होती है। हर बार वैक्सीनेशन के समय कार्ड साथ लेकर जाएं और सुनिश्चित करें कि नई डोज की जानकारी उसमें दर्ज हो। यदि बच्चा स्कूल बदलता है, शहर बदलता है या किसी दूसरे डॉक्टर से इलाज करवाता है तो यही रिकॉर्ड आगे के वैक्सीनेशन को समझने में मदद करता है।
अगर बच्चे की कोई वैक्सीन छूट गई है तो क्या करें?
कई बार बीमारी, यात्रा, अस्पताल बदलने या किसी अन्य कारण से बच्चे की कोई वैक्सीन निर्धारित समय पर नहीं लग पाती। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। माता-पिता बच्चे का वैक्सीनेशन रिकॉर्ड लेकर बाल रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करें। डॉक्टर बच्चे की उम्र और पहले लग चुकी वैक्सीन के आधार पर आगे का कैच-अप शेड्यूल बता सकते हैं। अपनी तरफ से पुरानी डोज को दोबारा लगवाने या वैक्सीनेशन शेड्यूल बदलने से बचें।

वैक्सीनेशन के बाद किन बातों का ध्यान रखें?
टीका लगने के बाद कुछ बच्चों में इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, लालिमा या सूजन हो सकती है। कुछ वैक्सीन के बाद हल्का बुखार भी हो सकता है। आमतौर पर ये प्रतिक्रियाएं थोड़े समय में ठीक हो जाती हैं, लेकिन यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, चेहरे या गले में सूजन, अत्यधिक सुस्ती या कोई गंभीर असामान्य लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
बच्चे को वैक्सीन लगने के बाद किसी भी दवा की खुराक अपने आप तय करने के बजाय डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेना बेहतर है।
माता-पिता इन बातों का रखें ध्यान
बच्चे का वैक्सीनेशन कार्ड हमेशा सुरक्षित रखें।
हर वैक्सीन की तारीख नोट करें।
कोई डोज छूटने पर डॉक्टर से कैच-अप शेड्यूल पूछें।
सरकारी और प्राइवेट वैक्सीन के अंतर को केवल कीमत के आधार पर न समझें।
प्राइवेट अस्पताल में अतिरिक्त वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर से उसके लाभ, जरूरत और संभावित खर्च के बारे में पूछें।
टीकाकरण के बाद बच्चे में गंभीर प्रतिक्रिया दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीनेशन के बीच अंतर मुख्य रूप से उपलब्ध वैक्सीन, सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम, अतिरिक्त वैक्सीन विकल्प, अस्पताल की सुविधा और लागत से जुड़ा हो सकता है। सरकारी अस्पताल में कम टीके दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि वहां बच्चे का जरूरी टीकाकरण नहीं हो रहा है। वहीं प्राइवेट अस्पताल में उपलब्ध अतिरिक्त वैक्सीन का निर्णय बच्चे की उम्र, स्वास्थ्य और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
माता-पिता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे की उम्र के अनुसार जरूरी टीकाकरण समय पर हो और उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। किसी भी अतिरिक्त वैक्सीन को लेकर भ्रम होने पर बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना सबसे उचित रहेगा।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। वैक्सीनेशन का शेड्यूल, अतिरिक्त वैक्सीन की आवश्यकता और बच्चे की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार निर्णय अलग हो सकता है। किसी भी वैक्सीन को लगवाने, रोकने या शेड्यूल बदलने से पहले योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह जरूर लें। वैक्सीन से जुड़ी गंभीर प्रतिक्रिया की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

