By: Vikash Kumar (Vicky)
Hamid Ansari Statement: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की एक हालिया टिप्पणी को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। अंसारी ने एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक पुराने कथन का संदर्भ देते हुए भारत के लिए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर चिंता व्यक्त की। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अंसारी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संदर्भ में बेहद चिंताजनक बताया।

क्या बोले थे हामिद अंसारी?
मोहम्मद हामिद अंसारी ने 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम संविधान विशेषज्ञ, वरिष्ठ वकील और लेखक एजी नूरानी के जीवन और विचारों पर केंद्रित था। कार्यक्रम में अंसारी ने एजी नूरानी की 2019 में प्रकाशित किताब The RSS: A Menace to India के संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक पुराने कथन का उल्लेख किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि नेहरू के अनुसार भारत के सामने साम्यवाद की तुलना में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर अधिक खतरा था। अंसारी ने जिस संदर्भ का उल्लेख किया, उसे नूरानी ने तत्कालीन विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक के रिकॉर्ड से जोड़ा था। इस ऐतिहासिक संदर्भ के सामने आने के बाद बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

बयान के बाद क्यों गरमाई राजनीति?
हामिद अंसारी की टिप्पणी सामने आने के बाद BJP नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई। विवाद का केंद्र हिंदू दक्षिणपंथी राजनीति और सांप्रदायिकता को भारत के लिए खतरे के रूप में देखने वाले उस ऐतिहासिक संदर्भ पर है, जिसका अंसारी ने अपने भाषण में उल्लेख किया। BJP की ओर से इस बयान को भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपरा के खिलाफ बताया गया। वहीं, इस मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे में विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में धर्मनिरपेक्षता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।

CM योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक कार्यक्रम में हामिद अंसारी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति के विचारों को भारतीयता और सनातन परंपरा के संदर्भ में बेहद चिंताजनक बताया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से सार्वजनिक जीवन में एक विशेष गरिमा की अपेक्षा होती है। उन्होंने अंसारी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे विचार भारत की संस्कृति और सनातन परंपरा के लिए डरावने हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणियां भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली हैं। उनके मुताबिक भारतीय परंपरा की मूल भावना समावेश और सभी को साथ लेकर चलने की है। यह मुख्यमंत्री योगी का राजनीतिक और वैचारिक पक्ष है, जबकि अंसारी की टिप्पणी का अपना अलग संदर्भ था।

योगी ने भारतीय परंपरा का दिया हवाला
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने भारतीय परंपरा में महिलाओं के सम्मान और सामाजिक समरसता से जुड़े विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा सभी को साथ लेकर चलने की बात करती है। योगी ने अंसारी की टिप्पणी को इसी व्यापक सांस्कृतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में चुनौती दी। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारतीय परंपरा को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।

नेहरू के पुराने कथन का संदर्भ क्या है?
इस विवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा वह कथन है जिसका हामिद अंसारी ने अपने भाषण में उल्लेख किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अंसारी ने इसे एजी नूरानी की किताब में दिए गए संदर्भ के आधार पर पेश किया।
रिपोर्टों में बताया गया है कि नूरानी ने इस कथन को पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक के रिकॉर्ड से जोड़ा था। इसलिए मौजूदा राजनीतिक बहस में यह केवल वर्तमान नेताओं के बयानों का मामला नहीं है, बल्कि एक पुराने ऐतिहासिक कथन की व्याख्या भी इसमें शामिल है। ऐतिहासिक कथनों की व्याख्या करते समय उनके मूल संदर्भ, समय और स्रोत को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है। मौजूदा विवाद में भी अलग-अलग राजनीतिक पक्ष इसी ऐतिहासिक संदर्भ की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
हामिद अंसारी की टिप्पणी पर BJP के कई नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। BJP सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने अंसारी के बयान के संदर्भ में कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने नेहरू के कथन और नूरानी की किताब का हवाला देते हुए कांग्रेस की विचारधारा को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए। हालांकि, किसी नेता द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों को संबंधित नेता का दावा ही माना जाना चाहिए। इन आरोपों से अपने आप किसी राजनीतिक दल की वैचारिक स्थिति का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकलता।

विवाद का व्यापक राजनीतिक संदर्भ
हामिद अंसारी की टिप्पणी और योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया के बीच भारत में राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक पहचान को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक बहस भी दिखाई देती है। एक तरफ अंसारी ने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से जुड़े खतरे और नागरिक राष्ट्रवाद की अवधारणा पर जोर दिया। दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ ने भारतीय और सनातन परंपरा को केंद्र में रखते हुए इस दृष्टिकोण की आलोचना की। दोनों पक्षों के विचार अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोणों को सामने रखते हैं।

कांग्रेस और BJP के बीच बढ़ सकता है विवाद
इस बयान के बाद BJP और कांग्रेस के बीच वैचारिक बहस और तेज होने की संभावना है। BJP नेताओं ने अंसारी के बयान को लेकर कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी खेमे की प्रतिक्रियाएं भी राजनीतिक बहस को आगे बढ़ा सकती हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धर्मनिरपेक्षता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और नागरिकता की अवधारणा को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।

अब विवाद का केंद्र क्या है?
फिलहाल विवाद के तीन प्रमुख पहलू हैं। पहला, हामिद अंसारी द्वारा नेहरू के पुराने कथन का उल्लेख। दूसरा, उस ऐतिहासिक कथन का मौजूदा भारत के संदर्भ में इस्तेमाल। और तीसरा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित BJP नेताओं द्वारा इस टिप्पणी की आलोचना।
अंसारी का बयान एक ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान राजनीतिक चिंताओं को जोड़ता है, जबकि योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के दृष्टिकोण से आई है। इसलिए इस पूरे विवाद को समझने के लिए दोनों बयानों के संदर्भ को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फिलहाल हामिद अंसारी की टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।
