By: Mala Mandal
देवघर। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में बांग्ला सावन की दूसरी सोमवारी के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमवार और त्रयोदशी के शुभ संयोग ने इस दिन के धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया, जिसके कारण सुबह से ही बाबा मंदिर परिसर, शिवगंगा, कतारबद्ध मार्गों और पूरे देवघर शहर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड सहित नेपाल से आए लाखों कांवरियों ने “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

बांग्ला सावन का महीना विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। रविवार देर रात से ही कांवरियों का जत्था बाबा नगरी में प्रवेश करने लगा था। सोमवार की भोर होते-होते मंदिर परिसर पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया। श्रद्धालुओं ने अनुशासित कतार में अपनी बारी का इंतजार किया और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक किया।

परंपरा के अनुसार श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर लगभग 108 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करते हैं। इस यात्रा के दौरान कांवरिये पूरी श्रद्धा, संयम और धार्मिक अनुशासन का पालन करते हुए देवघर पहुंचते हैं। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पहुंचकर वे गंगाजल अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं देश-दुनिया के कल्याण की कामना करते हैं।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पुरोहित लंबोदर महाराज ने बताया कि इस बार बांग्ला सावन की दूसरी सोमवारी अत्यंत शुभ और विशेष मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन होता है और इस बार प्रातःकाल त्रयोदशी तिथि का भी संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस तरह का संयोग भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। इसी कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी अधिक देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस शुभ अवसर पर सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। यही आस्था हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को लंबी और कठिन पैदल यात्रा करने के लिए प्रेरित करती है।

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। मंदिर मार्गों पर बैरिकेडिंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई व्यवस्था तथा भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के अधिकारी लगातार पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

बाबा नगरी में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा। जगह-जगह भजन-कीर्तन, शिव मंत्रों का उच्चारण और “बोल बम” के जयघोष से वातावरण शिवमय हो गया। स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से कांवरियों की सेवा के लिए नि:शुल्क शिविर भी लगाए गए हैं, जहां भोजन, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बांग्ला सावन की दूसरी सोमवारी के अवसर पर संध्या काल में बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में पारंपरिक बेलपत्र प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। यह प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। बेलपत्रों को आकर्षक कलात्मक स्वरूप देकर भगवान शिव की आराधना के लिए सजाया जाता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस अनूठी प्रदर्शनी को देखने के लिए मंदिर परिसर पहुंचते हैं। धार्मिक परंपरा और कला का यह अद्भुत संगम बाबा धाम की विशेष पहचान माना जाता है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा बैद्यनाथ धाम में सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया जलाभिषेक जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन और बांग्ला सावन के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। सोमवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बाबा बैद्यनाथ धाम करोड़ों शिवभक्तों की अटूट आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा केंद्र है। पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा, जिसने बाबा नगरी को पूरी तरह शिवमय बना दिया।


