By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
5 मई 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज मंगलवार के दिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे एकदंत संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

आज का पंचांग हमें दिनभर के शुभ और अशुभ समय के साथ-साथ ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति की भी जानकारी देता है। यदि आप आज व्रत या कोई शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो पंचांग के अनुसार सही समय जानना बेहद जरूरी है।
तिथि, पक्ष और वार की जानकारी
आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है और दिन मंगलवार है। यह संयोग भगवान गणेश की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। चतुर्थी तिथि विशेष रूप से गणेश जी को समर्पित होती है, इसलिए आज व्रत रखने और पूजा करने का विशेष महत्व है।

नक्षत्र, योग और करण का संयोग
आज के दिन ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही शिव और सिद्ध योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। करण की बात करें तो आज बव और बालव करण का प्रभाव रहेगा, जो कई कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
आज सूर्योदय सुबह 05:37 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 06:59 बजे। चंद्रमा का उदय रात 10:35 बजे और अस्त सुबह 07:39 बजे होगा। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है, इसलिए चंद्रमा के उदय का समय विशेष महत्व रखता है।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी जानकारी
आज दिशा शूल उत्तर दिशा में है। ऐसे में इस दिशा में यात्रा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए या उचित उपाय अपनाने चाहिए।

नवग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव
आज ग्रहों की स्थिति भी जीवन पर महत्वपूर्ण असर डालने वाली है। सूर्य और बुध मेष राशि में स्थित हैं, जिससे ऊर्जा और निर्णय क्षमता में वृद्धि हो सकती है। चंद्रमा धनु राशि में रहेगा, जिससे भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। मंगल और शनि मीन राशि में हैं, जो धैर्य और संयम की परीक्षा ले सकते हैं। बृहस्पति मिथुन राशि में होने से ज्ञान और संवाद क्षमता में वृद्धि के संकेत मिलते हैं। शुक्र वृषभ राशि में रहकर सुख-सुविधाओं में वृद्धि करेगा। राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे, जो कुछ मामलों में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि
एकदंत संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान कर संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम को गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

आज के शुभ और अशुभ समय का महत्व
किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त देखना आवश्यक होता है। पंचांग के अनुसार आज शिव और सिद्ध योग के कारण दिन के कई समय शुभ माने जा रहे हैं। हालांकि राहुकाल और अशुभ समय में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करने से बचना चाहिए।
यह जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

