By: Vikaash Kumar Raut (Vicky)
देवघर। झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने साइबर थाना कांड संख्या 71/23 के एक फरार प्राथमिक अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के नाम पर साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी उपभोक्ताओं को Google Pay, PhonePe और Paytm के फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर फोन करता था। इसके बाद वह लोगों को कैशबैक मिलने का लालच देता था और उन्हें PhonePe Gift Card बनाने के लिए प्रेरित करता था। जैसे ही उपभोक्ता उसके बताए अनुसार प्रक्रिया पूरी करते थे, आरोपी उस गिफ्ट कार्ड को रिडीम कर रकम की ठगी कर लेता था।
इतना ही नहीं, आरोपी Airtel Payment Bank अधिकारी बनकर भी लोगों को निशाना बनाता था। वह उपभोक्ताओं को यह कहकर डराता था कि उनका बैंक कार्ड बंद हो गया है। इसके बाद वह Airtel Thanks App के माध्यम से कार्ड को दोबारा चालू करने के नाम पर लोगों से जानकारी हासिल करता था और साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देता था।

देवघर साइबर थाना पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस को लगातार सूचना मिल रही थी कि आरोपी डिजिटल भुगतान एप्लीकेशन और बैंकिंग सेवाओं के नाम पर भोले-भाले लोगों को ठग रहा है। इसी आधार पर छापेमारी की योजना बनाई गई और पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां एटीएम और बैंक कॉल के जरिए धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आती थीं, वहीं अब ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म और मोबाइल बैंकिंग एप के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। आरोपी लोगों को कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट, कार्ड ब्लॉक और केवाईसी अपडेट जैसे बहाने बनाकर फंसाता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठग सबसे पहले लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे मोबाइल एप डाउनलोड करवाने, ओटीपी साझा करने या किसी लिंक पर क्लिक करवाने के जरिए बैंक खाते से रकम उड़ा लेते हैं। ऐसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
देवघर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी, डिजिटल पेमेंट कंपनी का कर्मचारी या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर निजी जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं। बैंक, यूपीआई एप और भुगतान कंपनियां कभी भी फोन पर ओटीपी, पिन या पासवर्ड नहीं मांगती हैं।

पुलिस ने यह भी कहा कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा स्थानीय साइबर थाना या पुलिस कंट्रोल रूम से भी संपर्क किया जा सकता है। समय रहते शिकायत करने पर ठगी गई राशि को वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
देवघर पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रही है। जिले में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस तकनीकी जांच और निगरानी के जरिए ऐसे अपराधियों तक पहुंच रही है। हाल के दिनों में कई मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

इस कार्रवाई में पुलिस अधिकारियों और स्थानीय थाना पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की और आरोपी को दबोचने में सफलता हासिल की। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन लेनदेन करते समय हमेशा आधिकारिक एप और वेबसाइट का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी ऑफर, कैशबैक या इनाम के लालच में आकर अपनी निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साथ ही मोबाइल और बैंकिंग एप में सुरक्षा फीचर का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

देवघर साइबर थाना की इस कार्रवाई को जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी साइबर अपराधियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि आम लोगों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

