By: Mala Mandal
देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर की गई छापेमारी में ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया और जांच को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने आरोपियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

जानकारी के अनुसार, साइबर थाना पुलिस को लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि जिले के विभिन्न इलाकों में कुछ लोग फर्जी तरीके से आम लोगों को अपने जाल में फंसाकर ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और गुप्त सूचना के आधार पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। इसके बाद जिले के अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर इस गिरोह का खुलासा किया गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को Google Pay, PhonePe, Paytm और Airtel Payment Bank का अधिकारी या कस्टमर केयर कर्मचारी बताकर लोगों को फोन करता था। आरोपी आम लोगों को कैशबैक, बैंक अकाउंट अपडेट, केवाईसी और कार्ड ब्लॉक होने जैसी बातें कहकर भ्रमित करते थे। इसके बाद लोगों से ओटीपी, बैंक डिटेल और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल कर उनके खातों से रकम उड़ा लेते थे।

इतना ही नहीं, गिरोह द्वारा लोगों को PhonePe Gift Card Create करने और उसे Redeem कराने के नाम पर भी ठगी की जा रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेते थे और फिर ऑनलाइन माध्यम से उनके बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे।
साइबर थाना पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और एक प्रतिबंधित सिम कार्ड बरामद किया गया है। बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल कई राज्यों में साइबर ठगी की घटनाओं में किया गया होगा।

प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के सदस्य फर्जी मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर लोगों को झांसा देते थे। आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों तक पहुंच बनाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया गया है।
देवघर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, एटीएम नंबर या पासवर्ड साझा न करें। किसी भी प्रकार के कैशबैक, केवाईसी अपडेट या बैंक अकाउंट बंद होने जैसी कॉल आने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। पुलिस ने यह भी कहा कि कोई भी बैंक या डिजिटल पेमेंट कंपनी फोन कर ओटीपी या निजी जानकारी नहीं मांगती है।

साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस ने लोगों को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। साथ ही साइबर ठगी होने पर तुरंत स्थानीय थाना या साइबर थाना से संपर्क करने को कहा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते शिकायत मिलने पर कई मामलों में ठगी की गई राशि को रोका या वापस कराया जा सकता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे गिरोहों पर लगातार कार्रवाई की जाएगी। देवघर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध पर बड़ी सफलता माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई से साइबर ठगी की घटनाओं में कमी आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही से बैंक खातों से रकम गायब हो सकती है। इसलिए किसी भी अनजान लिंक, ऐप या कॉल पर भरोसा करने से पहले पूरी तरह जांच करना जरूरी है।
देवघर साइबर थाना की इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर साइबर अपराध के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।

