By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर सदर अस्पताल में सोमवार देर शाम उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक विक्षिप्त महिला अस्पताल की चौथी मंजिल पर चढ़कर आत्महत्या करने का प्रयास करने लगी। महिला को ऊंचाई पर खड़ा देख अस्पताल परिसर में मौजूद मरीजों, परिजनों और कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुट गई और हर कोई महिला को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश में लग गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विक्षिप्त महिला काफी देर तक चौथी मंजिल के किनारे खड़ी रही। महिला की स्थिति को देखते हुए किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। घटना की जानकारी तत्काल अस्पताल के उपाधीक्षक को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आया और इसकी सूचना अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। वहीं एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मौके पर बुला ली गई, ताकि सीढ़ियों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से महिला को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की निगाहें लगातार महिला पर टिकी हुई थीं और हर कोई उसकी सलामती की दुआ कर रहा था।

इसी बीच सदर अस्पताल में कार्यरत एक बावर्ची ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी का परिचय दिया। बताया जा रहा है कि उसने महिला को खाना खिलाने का लालच देकर धीरे-धीरे खिड़की की तरफ बुलाया। जैसे ही महिला खिड़की के करीब पहुंची, मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे पकड़कर कमरे के अंदर खींच लिया। इस तरह एक बड़ा हादसा टल गया और महिला की जान बाल-बाल बच गई।
महिला को सुरक्षित कमरे के अंदर लाए जाने के बाद अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि इस घटना ने सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि थोड़ी सी भी चूक हो जाती तो महिला की जान जा सकती थी और अस्पताल प्रशासन को बड़ी जवाबदेही का सामना करना पड़ता।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक विक्षिप्त महिला को लगभग एक महीने से सदर अस्पताल में क्यों रखा गया था। जानकारी के अनुसार महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है, इसके बावजूद अस्पताल में उसके लिए कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी। न तो महिला की निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मी तैनात किए गए थे और न ही उसे किसी सुरक्षित वार्ड या मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजने की पहल की गई।

लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण ही महिला चौथी मंजिल तक पहुंच गई। यदि समय रहते उसे नहीं रोका जाता तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता था। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों ने भी इस घटना के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।
घटना के दौरान अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जुट गई थी। कई लोग अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाते नजर आए। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन की व्यवस्था पर नाराजगी भी जताई। लोगों का कहना था कि सदर अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, खासकर तब जब वहां मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीज भी रह रहे हों।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा अस्पताल के बावर्ची की हो रही है, जिसने अपनी समझदारी से महिला की जान बचा ली। स्थानीय लोग उसकी सराहना कर रहे हैं और उसे सम्मानित किए जाने की मांग भी उठने लगी है। यदि बावर्ची ने समय रहते हिम्मत और सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।

फिलहाल महिला सुरक्षित है और अस्पताल प्रशासन द्वारा उसकी निगरानी की जा रही है। वहीं इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों की मांग है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की जाए और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो सकें।
देवघर सदर अस्पताल में हुई यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सरकारी अस्पतालों में मानसिक रूप से बीमार और बेसहारा लोगों की देखरेख के लिए ठोस व्यवस्था की कितनी जरूरत है। फिलहाल एक बड़ी दुर्घटना टल गई, लेकिन इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं।

