By: Mala Mandal
Ashadha Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है, जिसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय पितृ दोष को शांत करने, जीवन की बाधाओं को कम करने और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में सहायक माने जाते हैं।

यदि आपके जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, कार्य बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, आर्थिक परेशानियां बनी रहती हैं या मानसिक अशांति का सामना करना पड़ रहा है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए उपाय शुभ फल प्रदान कर सकते हैं।
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
आषाढ़ अमावस्या को सनातन परंपरा में पितरों के निमित्त विशेष तिथि माना गया है। इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान, पितरों का तर्पण, ब्राह्मणों एवं जरूरतमंदों को दान और भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की आराधना करने से मंगल दोष, भय, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की अनेक बाधाओं से राहत मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आषाढ़ अमावस्या पर करें यह विशेष उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान हनुमान के मंदिर जाएं। उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। इसके साथ ही अपने पितरों का स्मरण करते हुए तिल मिश्रित जल से तर्पण करें। यदि तर्पण करना संभव न हो, तो जरूरतमंद लोगों को भोजन, काले तिल, वस्त्र या अन्न का दान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

पितृ दोष से राहत पाने के लिए क्या करें?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आषाढ़ अमावस्या के दिन यह उपाय शुभ माना जाता है—
– पितरों के नाम से तर्पण करें।
– पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।
– काले तिल का दान करें।
– गाय, कौए और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।
– भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा करें।
– शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर पितरों के निमित्त दीपक जलाएं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों को श्रद्धा और आस्था के साथ करने से पितृ दोष के प्रभाव में कमी आने की मान्यता है।

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए करें ये काम
चूंकि इस बार अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए हनुमान जी की विशेष पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने, लाल वस्त्र चढ़ाने तथा गुड़-चना का भोग लगाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, तनाव और नकारात्मकता दूर होने की भी मान्यता है।

आषाढ़ अमावस्या पर दान का महत्व
सनातन धर्म में अमावस्या पर दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस दिन अन्न, वस्त्र, काले तिल, छाता, जल से भरा पात्र, फल तथा दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने और गौ सेवा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
आषाढ़ अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचें। नशे और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें। धार्मिक कार्य श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ करें। यदि संभव हो तो इस दिन जरूरतमंदों की सहायता अवश्य करें।

14 जुलाई 2026 की आषाढ़ अमावस्या धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग भी बना रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का तर्पण, दान-पुण्य, भगवान हनुमान की पूजा और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं हैं और इन्हें श्रद्धा एवं विश्वास के साथ ही देखा जाना चाहिए।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय परंपराओं और उपलब्ध शास्त्रीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य धार्मिक जानकारी प्रदान करना है। Zee Media किसी भी धार्मिक दावे या फल की पुष्टि नहीं करता। किसी भी पूजा, अनुष्ठान या ज्योतिषीय उपाय को करने से पहले योग्य विद्वान या आचार्य से परामर्श अवश्य लें।


