By: Mala Mandal
देवघर। जसीडीह स्थित इस्कॉन देवघर के प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर इस्कॉन देवघर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, महायज्ञ, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, श्रीकृष्ण जन्म कथा, महाअभिषेक, महाआरती और महाप्रसाद वितरण सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस्कॉन देवघर के प्रमुख श्री श्रीनिवास गोपाल दास जी ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत 3 सितंबर 2026 से होगी। इस दिन सबसे पहले भगवान का आवाहन किया जाएगा, जिसे धार्मिक परंपरा में अधिवास कहा जाता है। लगभग एक घंटे तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम में इस्कॉन देवघर के अनुयायी, स्थानीय श्रद्धालु तथा विभिन्न प्रांतों से आए भक्त शामिल होंगे।

4 सितंबर को होगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन
जन्माष्टमी महोत्सव का मुख्य आयोजन 4 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन सुबह से ही इस्कॉन देवघर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। सुबह 6 बजे मंगल आरती के साथ दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इसके बाद सुबह 10 बजे महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करेंगे। शाम 4:30 बजे मंगल चरण भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से रात 8:30 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और भारतीय संस्कृति से श्रद्धालुओं को परिचित कराया जाएगा। रात 8:30 बजे से श्रीकृष्ण जन्म कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद रात 10 बजे से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक महाअभिषेक का विशेष कार्यक्रम चलेगा।

सात नदियों के जल और विभिन्न सामग्रियों से होगा महाअभिषेक
इस्कॉन देवघर के प्रमुख श्री श्रीनिवास गोपाल दास जी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्म के अवसर पर भगवान का भव्य महाअभिषेक किया जाएगा। इस अभिषेक में सात नदियों का जल, सात प्रकार के फलों का रस, दूध, दही, घी, मधु, गुड़ तथा विभिन्न अन्य पूजन सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा। महाअभिषेक की खास बात यह होगी कि इसमें केवल इस्कॉन देवघर के अनुयायी ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु भी भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक कर सकेंगे। भगवान के जन्म के उपरांत महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच चरणामृत और महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा।

5 सितंबर को मनाया जाएगा नंदोत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर 2026 को नंदोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दिन का धार्मिक महत्व और भी विशेष है, क्योंकि इसी दिन इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद जी का प्राकट्य दिवस भी मनाया जाएगा। नंदोत्सव के दिन कार्यक्रम की शुरुआत सुबह मंगल आरती से होगी। सुबह 8 बजे गुरु पूजा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 8:30 बजे भागवत कथा होगी। सुबह 9:30 बजे श्रील प्रभुपाद जी की महिमा का कीर्तन किया जाएगा। सुबह 11:30 बजे पुष्प अभिषेक का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे भोग निवेदन एवं महाआरती की जाएगी। दोपहर 12:30 बजे से महाप्रसाद वितरण शुरू होगा। इस दौरान लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरण करने की तैयारी है। महाप्रसाद वितरण का कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहेगा। वहीं शाम 4:30 बजे से भजन-कीर्तन के साथ नंदोत्सव के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में शामिल होकर भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का आनंद ले सकेंगे।

श्रद्धालुओं से सेवा में भाग लेने की अपील
इस्कॉन देवघर की ओर से देवघर की जनता से जन्माष्टमी महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। इस्कॉन देवघर ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने का अवसर भी है।

इस्कॉन देवघर की ओर से देवतुल्य जनता से आग्रह किया गया है कि वे अपने व्यस्त समय में से थोड़ा समय निकालकर भगवान की सेवा में सहभागी बनें और इस पावन अवसर पर पुण्य के भागी बनें। श्रद्धालुओं के लिए जन्माष्टमी और नंदोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

जसीडीह स्थित इस्कॉन देवघर में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 2026 श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहने वाला है। अधिवास से लेकर श्रीकृष्ण जन्म, महाअभिषेक, महाआरती, चरणामृत और महाप्रसाद वितरण तथा अगले दिन नंदोत्सव और श्रील प्रभुपाद जी के प्राकट्य दिवस तक पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिलेगा।

