By: Mala Mandal
रांची। झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपात्र राशन कार्डधारकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार की जांच प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ऐसे राशन कार्ड सामने आए हैं, जो निर्धारित नियमों के अनुसार पात्रता की श्रेणी में नहीं आते थे। राज्य में करीब 6.29 लाख अपात्र राशन कार्डधारकों की पहचान की गई है, जिनमें से अब तक 1.63 लाख राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि राशन योजना का लाभ केवल जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए लगातार सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। जांच के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए, जहां नियमों का उल्लंघन कर राशन कार्ड बनवाए गए थे या फिर लाभार्थियों की स्थिति बदलने के बाद भी कार्ड सक्रिय थे।

डिजिटल सत्यापन से सामने आ रही गड़बड़ियां
झारखंड में राशन कार्डों के सत्यापन के लिए डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। आधार लिंकिंग, ई-केवाईसी और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर लाभार्थियों की जानकारी का मिलान किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्तियों के नाम पर बने कार्ड, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज कार्ड और अपात्र परिवारों के कार्ड की पहचान की जा रही है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से लगातार जिलों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि राशन वितरण व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जाए। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी अनाज योजना का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

क्यों रद्द किए जा रहे हैं राशन कार्ड?
जांच में कई ऐसे कारण सामने आए हैं, जिनकी वजह से राशन कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं। इनमें गलत जानकारी देकर कार्ड बनवाना, पात्रता नहीं होने के बावजूद योजना का लाभ लेना, परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव के बाद भी कार्ड जारी रहना और दस्तावेजों में गड़बड़ी जैसे मामले शामिल हैं। सरकार का मानना है कि अपात्र लोगों के हटने से वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ आसानी से मिल सकेगा। इससे राशन वितरण प्रणाली में सुधार आएगा और सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

गरीब परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
झारखंड में बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत मिलने वाले राशन पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि अपात्र लाभार्थियों के हटने के बाद बचने वाले संसाधनों का इस्तेमाल जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया पूरी जांच के बाद ही की जा रही है। किसी भी लाभार्थी को बिना उचित प्रक्रिया के योजना से बाहर नहीं किया जा रहा है। जिन लोगों के कार्ड संदिग्ध पाए जा रहे हैं, उन्हें सत्यापन का अवसर भी दिया जा रहा है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि राशन कार्ड सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा। आने वाले समय में और भी कार्डों की जांच की जाएगी। विभाग की कोशिश है कि राशन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जाए।

झारखंड में 6.29 लाख अपात्र राशन कार्डों की पहचान और 1.63 लाख कार्ड रद्द होने की कार्रवाई को सरकार की ओर से बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे जहां एक ओर फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर वास्तविक गरीब परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी।



