By: Mala Mandal
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्यभर के हजारों छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। राजधानी रांची में बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन करते हुए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने राज्य सरकार और संबंधित आयोगों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी झारखंड के विभिन्न जिलों से रांची पहुंचे थे। सभी छात्र संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए और वहां से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों को बुलंद किया। कई पोस्टरों पर “14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करो”, “JPSC और JSSC की CBI जांच कराओ” तथा “भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाओ” जैसे नारे लिखे थे।

छात्रों का आरोप है कि हाल ही में घोषित 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका कहना है कि आयोग ने परिणाम जारी करने से पहले श्रेणीवार कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए। इसके अलावा OMR शीट और मेरिट सूची को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि पारदर्शिता की कमी के कारण योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है।

प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने कहा कि वे वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही कथित गड़बड़ियों से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होगी तो मेहनती अभ्यर्थियों का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।

छात्रों ने मांग की कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नई परीक्षा आयोजित की जाए। साथ ही पूरे चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्र नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। उनका आरोप है कि JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

इस बीच मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने भी संसद परिसर में JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली का मुद्दा उठाया। भाजपा नेताओं ने पूरे मामले की CBI जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
दूसरी ओर, राज्य में कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच पहले से जारी है। CID इस मामले में कई लोगों से पूछताछ कर रही है। पूर्व JPSC अध्यक्ष से भी लगातार पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसी मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष होगी तभी योग्य युवाओं को न्याय मिल सकेगा और सरकारी संस्थाओं पर जनता का भरोसा कायम रहेगा।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी परीक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर सवाल उठते हैं तो संबंधित आयोग को समय पर सभी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि अभ्यर्थियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
फिलहाल झारखंड में JPSC और JSSC को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। छात्रों के आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बीच अब सभी की नजर राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति और भर्ती प्रक्रिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

