By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
क्यों खास मानी जा रही है ज्येष्ठ अमावस्या 2026
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया गया है, लेकिन साल 2026 की ज्येष्ठ अमावस्या कई मायनों में बेहद खास मानी जा रही है। इस दिन शनि जयंती, पितरों की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर और वट सावित्री व्रत तीनों एक साथ पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह दुर्लभ संयोग साल की सबसे प्रभावशाली अमावस्याओं में से एक माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान और उपायों का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।

कब है ज्येष्ठ अमावस्या 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 11 मिनट से होगी। वहीं इसका समापन 17 मई 2026 को रात्रि 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई 2026, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा।
शनि जयंती का बढ़ेगा महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भगवान शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से शनि देव की पूजा करने और जरूरतमंदों को दान देने से शनि दोष कम होता है और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होने लगती हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, उनके लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

पितरों की कृपा पाने का शुभ अवसर
अमावस्या तिथि को पितरों को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना और पितरों के नाम से दान करना शुभ माना गया है। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता भी है।

वट सावित्री व्रत का भी रहेगा विशेष महत्व
16 मई 2026 को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री व्रत भी रखेंगी। इस दिन वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य प्रदान करता है।

ज्येष्ठ अमावस्या पर करें ये खास उपाय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। काले तिल, उड़द दाल, काला कपड़ा और लोहे का दान करने से शनि दोष कम हो सकता है। वहीं पितरों की शांति के लिए जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करना लाभकारी माना गया है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना भी पुण्यदायी बताया गया है।

ब्रह्म मुहूर्त स्नान का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और ध्यान करना विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि इस समय किए गए मंत्र जाप और पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

इन राशियों के लिए माना जा रहा है शुभ
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी माना जा रहा है। विशेष रूप से मकर, कुंभ, वृषभ और तुला राशि के जातकों को शनि पूजा और दान-पुण्य से शुभ फल मिलने की संभावना है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष और पंचांग पर आधारित है। किसी भी पूजा, उपाय या व्रत को करने से पहले विशेषज्ञ या पंडित की सलाह अवश्य लें।

