By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। शहर के प्रसाद अस्पताल के ICU वार्ड में अचानक भीषण आग लगने से तीन मरीजों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही मिनटों में जहरीला धुआं पूरे वार्ड में फैल गया। धुएं के कारण मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना उस समय हुई जब ICU वार्ड में कई गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा था। अचानक वार्ड के एक हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया, जिसके बाद देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कोशिश शुरू की, लेकिन धुएं के तेजी से फैलने के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के कुछ ही देर बाद अस्पताल के भीतर चीख-पुकार मच गई। मरीजों के परिजन अपने प्रियजनों को बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ने लगे। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया जाता तो जानमाल का नुकसान कम हो सकता था।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक तीन मरीजों की मौत हो चुकी थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इन मरीजों की मौत आग की लपटों से ज्यादा जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई है। अधिकारियों ने कहा है कि मौत के सही कारणों की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को तत्काल दूसरे वार्डों और नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पूरे अस्पताल परिसर की जांच शुरू कर दी है ताकि किसी अन्य खतरे की संभावना को समाप्त किया जा सके। अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अस्पताल के विद्युत उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग ने भी घटना को गंभीरता से लिया है। विभागीय अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जिले के अन्य अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन मौजूद रहते हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में नियमित रूप से फायर ऑडिट कराया जाना चाहिए और कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। कई बार छोटी तकनीकी खराबियां बड़े हादसों का कारण बन जाती हैं, इसलिए सुरक्षा मानकों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। उनका कहना है कि मरीज इलाज के लिए अस्पताल आते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। वहीं मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल है। पूरा शहर इस दुखद घटना से स्तब्ध है और लोग पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुई यह घटना स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।

