By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर, 03 जून 2026। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए देवघर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक देवघर के निर्देश पर साइबर थाना की टीम ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों पर विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल सेवाओं के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने का आरोप है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर थाना को गुप्त सूचना मिली थी कि जिले के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय साइबर अपराधी खुद को विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों, डिजिटल पेमेंट सेवाओं तथा बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत कर लोगों से ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर साइबर थाना की टीम ने तकनीकी अनुसंधान और गुप्त निगरानी शुरू की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिसके बाद संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक जांच में इनकी संलिप्तता साइबर ठगी के मामलों में पाई गई। पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड, पांच डेबिट कार्ड तथा तीन हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है ताकि साइबर अपराध के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को अपना शिकार बनाता था। आरोपी खुद को विभिन्न डिजिटल भुगतान सेवाओं, कस्टमर केयर सेंटरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान वे उपभोक्ताओं को कैशबैक, रिफंड, बैंकिंग सुविधा या तकनीकी सहायता का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन भुगतान प्लेटफॉर्म से जुड़े ग्राहकों को विशेष ऑफर और कैशबैक का झांसा देते थे। इसके लिए वे लोगों को मोबाइल एप्लीकेशन या डिजिटल गिफ्ट कार्ड से संबंधित प्रक्रिया अपनाने के लिए कहते थे। जैसे ही उपभोक्ता उनकी बताई प्रक्रिया का पालन करता था, उसके खाते से राशि निकाल ली जाती थी या उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता था।

इसके अलावा आरोपी खुद को बैंकिंग सेवा से जुड़े अधिकारी बताकर उपभोक्ताओं को फोन करते थे और खाते या कार्ड से संबंधित समस्या का हवाला देकर विश्वास जीतते थे। बाद में वे कार्ड को पुनः सक्रिय करने, केवाईसी अपडेट करने या अन्य बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर लोगों से गोपनीय जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते थे। इसी जानकारी का उपयोग कर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता था।
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ मामलों में किसानों और बेरोजगार युवाओं को सरकारी योजनाओं एवं ऋण सुविधा का लाभ दिलाने का झांसा देकर भी ठगी की जा रही थी। अपराधी फर्जी मोबाइल नंबरों का उपयोग कर लोगों को विश्वास में लेते थे और उनसे विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे।

देवघर पुलिस ने कहा है कि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितने राज्यों या जिलों तक फैला हुआ है और किन-किन लोगों को इनकी गतिविधियों से नुकसान पहुंचा है।
पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा किए गए फोन कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। किसी भी परिस्थिति में बैंक खाता संख्या, ओटीपी, सीवीवी नंबर, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक, डिजिटल भुगतान सेवा, कस्टमर केयर या सरकारी अधिकारी बताकर जानकारी मांगता है तो उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। समय-समय पर जारी होने वाली पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह का पालन कर लोग खुद को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रख सकते हैं।

देवघर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में भी साइबर ठगों के खिलाफ विशेष अभियान जारी रहेगा ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

