By: Mala Mandal
Bhadrapada Purnima 2026 Date: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हर महीने आने वाली पूर्णिमा पर स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करने की परंपरा है। भाद्रपद महीने की पूर्णिमा भी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या किसी तीर्थ स्थल में स्नान करने, जरूरतमंदों को दान देने और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। वहीं पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी का स्मरण भी किया जाता है। इस साल भाद्रपद पूर्णिमा को लेकर एक सवाल लोगों के मन में है कि आखिर व्रत किस दिन रखा जाएगा? क्या स्नान-दान और पूर्णिमा व्रत अलग-अलग तारीखों में होंगे या इस बार दोनों एक ही दिन किए जाएंगे? आइए जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा 2026 की सही तारीख, पूर्णिमा तिथि का समय और इस दिन होने वाले प्रमुख धार्मिक कार्यों के बारे में।

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर 2026 की रात 11 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी। यह पूर्णिमा तिथि 26 सितंबर 2026 की रात 10 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। क्योंकि पूर्णिमा तिथि 26 सितंबर को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
इस दिन श्रद्धालु पूर्णिमा का स्नान, दान और धार्मिक पूजा-पाठ कर सकते हैं।

क्या इस बार दो दिन का रहेगा भेद?
भाद्रपद पूर्णिमा के मामले में इस वर्ष तारीखों को लेकर ज्यादा असमंजस की जरूरत नहीं है। पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात में शुरू हो रही है, जबकि इसका अधिकांश दिन 26 सितंबर को रहेगा। उदयातिथि के अनुसार पूर्णिमा 26 सितंबर को ही मानी जाएगी। सबसे खास बात यह है कि इस दिन पूर्णिमा का चंद्रोदय भी हो रहा है। इसलिए पूर्णिमा व्रत और चंद्रमा की पूजा के लिए भी 26 सितंबर की तारीख ही रहेगी। यानी इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा के व्रत, स्नान और दान की तारीख अलग-अलग नहीं होगी। तीनों धार्मिक कार्य 26 सितंबर 2026 को ही किए जाएंगे।

भाद्रपद पूर्णिमा पर क्या किया जाता है?
पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की धार्मिक परंपरा है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान किया जाता है। ऐसा संभव न हो तो घर पर स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा निभाई जा सकती है। स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा का आयोजन भी करते हैं। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों के साथ सत्यनारायण कथा सुनने की परंपरा है। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अन्न या अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान करना शुभ माना जाता है।

सुबह होगी भगवान सत्यनारायण की पूजा
भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। पूजा में फल, फूल, पंचामृत, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सत्यनारायण कथा सुनने और भगवान विष्णु का स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा का महत्व
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में दिखाई देता है। हिंदू धार्मिक परंपरा में पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने की परंपरा है। इस दिन शाम या रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद जल अर्पित किया जा सकता है। इसके साथ ही मां लक्ष्मी का स्मरण और पूजा भी की जाती है। कई घरों में पूर्णिमा की रात दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की आराधना की जाती है। चंद्र पूजा की विधि और समय अलग-अलग स्थानों पर कुछ अंतर के साथ हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय देखना उचित रहेगा।

भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान-दान क्यों महत्वपूर्ण?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पूर्णिमा के दिन स्नान और दान को विशेष पुण्यदायी माना गया है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, मिठाई या जरूरत की अन्य वस्तुओं का दान कर सकते हैं। दान करते समय दिखावे के बजाय जरूरतमंद व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता का ध्यान रखना बेहतर माना जाता है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना भी इस दिन की धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
भाद्रपद पूर्णिमा पर क्या करें?
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करें।
अपनी श्रद्धा के अनुसार सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा करें।
पूर्णिमा के अवसर पर जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या भोजन का दान करें।
शाम के समय दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की पूजा करें।
चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें।
दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण और धार्मिक कार्यों में समय बिताएं।

क्या भाद्रपद पूर्णिमा पर व्रत रखा जाता है?
हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु व्रत रख सकते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। सुबह भगवान विष्णु की पूजा और सत्यनारायण कथा का श्रवण किया जाता है। इस बार चंद्रमा का दर्शन पूर्णिमा की तारीख यानी 26 सितंबर को ही होगा, इसलिए पूर्णिमा व्रत के लिए भी 26 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण रहेगी।
भाद्रपद पूर्णिमा के बाद शुरू होता है पितृ पक्ष
भाद्रपद पूर्णिमा के बाद हिंदू धार्मिक कैलेंडर में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। इसी वजह से भाद्रपद पूर्णिमा का दिन धार्मिक कैलेंडर में महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्णिमा के बाद आने वाली प्रतिपदा से पितृ पक्ष की शुरुआत की परंपरा है, हालांकि स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथियों की पुष्टि करना उचित रहता है।

25 सितंबर को क्या करें?
25 सितंबर को पूर्णिमा तिथि रात 11:06 बजे शुरू होगी। इसलिए पूरे दिन सामान्य धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद पूर्णिमा का मुख्य स्नान-दान और व्रत 26 सितंबर को माना जाएगा। यदि आप पूर्णिमा से संबंधित कोई विशेष धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं तो स्थानीय पंचांग में दिए गए समय के अनुसार ही पूजा की विधि और मुहूर्त तय करें।
26 सितंबर को रहेगा भाद्रपद पूर्णिमा का मुख्य पर्व
26 सितंबर 2026 शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा का मुख्य पर्व रहेगा। इसी दिन उदयातिथि के आधार पर पूर्णिमा का स्नान, दान और व्रत किया जाएगा। पूर्णिमा का चंद्रोदय भी इसी दिन होने के कारण चंद्रमा की पूजा के लिए भी यही तारीख रहेगी।
इस तरह इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा के व्रत, स्नान और दान को लेकर दो अलग-अलग तारीखों का भेद नहीं रहेगा।

भाद्रपद पूर्णिमा 2026: एक नजर में
भाद्रपद पूर्णिमा: 26 सितंबर 2026, शनिवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 25 सितंबर 2026, रात 11:06 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 सितंबर 2026, रात 10:18 बजे
उदयातिथि के अनुसार पूर्णिमा: 26 सितंबर
पूर्णिमा व्रत: 26 सितंबर
स्नान और दान: 26 सितंबर
सत्यनारायण पूजा: 26 सितंबर
चंद्रमा की पूजा: 26 सितंबर की रात, स्थानीय चंद्रोदय के अनुसार
जरूरी बात
भाद्रपद पूर्णिमा की तारीख उदयातिथि के आधार पर 26 सितंबर 2026 मानी जा रही है। इस बार पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात शुरू होकर 26 सितंबर की रात समाप्त होगी। चूंकि 26 सितंबर को पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी और इसी दिन चंद्रोदय भी होगा, इसलिए व्रत, स्नान और दान के लिए 26 सितंबर ही प्रमुख तारीख रहेगी।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और वैदिक पंचांग में दी गई तिथि-गणना के आधार पर तैयार किया गया है। अलग-अलग स्थानों, पंचांग पद्धतियों और स्थानीय सूर्योदय-चंद्रोदय के समय के कारण मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है। किसी विशेष पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य से समय की पुष्टि अवश्य करें। यह जानकारी धार्मिक आस्था और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

