By: Mala Mandal
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हिंदू समुदाय को लेकर दिए गए कथित ‘4 प्रतिशत हिंदुओं को बर्दाश्त करने’ वाले बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। बयान में इस्तेमाल किए गए ‘बर्दाश्त’ शब्द को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान की आबादी में हिंदुओं की वास्तविक हिस्सेदारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रपति जरदारी के बयान में हिंदुओं की आबादी करीब 4 प्रतिशत बताए जाने की बात सामने आने के बाद पाकिस्तान की आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों से इसकी तुलना की जा रही है। पाकिस्तान की 2023 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक श्रेणी में हिंदू आबादी 38,67,729 दर्ज की गई है, जो कुल आबादी का 1.61 प्रतिशत है। इसके अलावा ‘Scheduled Castes’ की अलग श्रेणी में 13,49,487 लोग दर्ज हैं, जो 0.56 प्रतिशत हैं।

पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी का आंकड़ा कितना है?
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 जनगणना रिपोर्ट में धर्म के आधार पर आबादी का विस्तृत आंकड़ा दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की कुल गणना की गई आबादी 24 करोड़ 4 लाख 58 हजार 89 थी। इनमें 23 करोड़ 16 लाख 86 हजार 709 लोग मुस्लिम दर्ज किए गए, जबकि हिंदू जति श्रेणी में 38 लाख 67 हजार 729 लोग दर्ज हुए। आधिकारिक तालिका में Scheduled Castes को हिंदू से अलग श्रेणी में दिखाया गया है। इस वजह से अलग-अलग रिपोर्टों में पाकिस्तान की हिंदू आबादी का प्रतिशत अलग तरीके से प्रस्तुत होता है। कुछ जनसांख्यिकीय स्रोत हिंदू जति और Scheduled Castes को मिलाकर करीब 2.17 प्रतिशत का आंकड़ा बताते हैं। ऐसे में 2.17 प्रतिशत का इस्तेमाल करते समय यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह किस श्रेणी या गणना पद्धति पर आधारित है।

4 प्रतिशत के दावे पर क्यों उठ रहे सवाल?
राष्ट्रपति के बयान में हिंदुओं की संख्या 4 प्रतिशत बताए जाने की बात सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल आंकड़ों को लेकर है। अगर 2023 की आधिकारिक जनगणना के धार्मिक वर्गीकरण को आधार माना जाए, तो हिंदू जति की हिस्सेदारी 1.61 प्रतिशत है। Scheduled Castes को जोड़ने पर यह आंकड़ा 2.17 प्रतिशत तक पहुंचता है।यानी 4 प्रतिशत का आंकड़ा आधिकारिक 2023 जनगणना के इन आंकड़ों से मेल नहीं खाता। यही वजह है कि बयान में इस्तेमाल किए गए प्रतिशत को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी बयान में आंकड़ा गलत होने का आकलन करते समय यह देखना भी जरूरी है कि वक्ता ने किस स्रोत, अनुमान या आबादी की श्रेणी को आधार बनाया था। इसलिए 4 प्रतिशत के आंकड़े को बिना अतिरिक्त संदर्भ के आधिकारिक जनगणना का आंकड़ा बताना उचित नहीं होगा।

‘बर्दाश्त’ शब्द पर भी विवाद
इस पूरे मामले में केवल प्रतिशत का सवाल नहीं है। बयान में कथित तौर पर ‘बर्दाश्त’ शब्द के इस्तेमाल ने भी विवाद को जन्म दिया है।
आलोचकों का कहना है कि किसी देश के अल्पसंख्यक समुदाय को ‘बर्दाश्त’ करने की भाषा लोकतांत्रिक नागरिक अधिकारों की भावना से मेल नहीं खाती। धार्मिक अल्पसंख्यकों को केवल बहुसंख्यक समाज की सहनशीलता पर निर्भर समुदाय के रूप में देखने के बजाय उन्हें समान नागरिक अधिकारों के साथ देखे जाने की जरूरत है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की सरकार और उसके राजनीतिक नेतृत्व की ओर से समय-समय पर अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों और सुरक्षा की बात की जाती रही है। ऐसे में राष्ट्रपति के पद से जुड़े किसी बयान में इस्तेमाल शब्दों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

पाकिस्तान में हिंदू समुदाय कहां ज्यादा रहता है?
पाकिस्तान में हिंदू आबादी मुख्य रूप से सिंध प्रांत में केंद्रित है। 2023 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार सिंध में हिंदू जति की संख्या 35,75,848 थी, जो प्रांत की कुल आबादी का 6.43 प्रतिशत है। इसके अलावा Scheduled Castes की संख्या 13,25,559 दर्ज की गई, जो सिंध की आबादी का 2.38 प्रतिशत है। इसके मुकाबले पंजाब में हिंदू जति की हिस्सेदारी 0.18 प्रतिशत, बलूचिस्तान में 0.39 प्रतिशत और खैबर पख्तूनख्वा में करीब 0.01 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा सिंध में रहता है।

अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर पहले से बहस
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति को लेकर लंबे समय से मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे उठते रहे हैं। जबरन धर्म परिवर्तन, जबरन विवाह, धार्मिक भेदभाव और हिंसा जैसे मुद्दों पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय तथा मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति के स्तर से आने वाला कोई भी बयान केवल राजनीतिक बयान नहीं रह जाता, बल्कि उसे अल्पसंख्यकों के प्रति सरकार के रवैये के संकेत के तौर पर भी देखा जाता है। यही कारण है कि ‘4 प्रतिशत हिंदुओं को बर्दाश्त’ करने वाले कथित बयान ने दो अलग-अलग सवाल खड़े किए हैं। पहला सवाल आबादी के आंकड़े को लेकर है और दूसरा सवाल उस भाषा को लेकर है, जिसमें एक धार्मिक समुदाय को देश में मौजूद अल्पसंख्यक के रूप में संबोधित किया गया।

आंकड़ों को लेकर क्या है सही तस्वीर?
उपलब्ध आधिकारिक 2023 जनगणना के अनुसार हिंदू जति श्रेणी में 38.68 लाख से अधिक लोग दर्ज हैं, यानी 1.61 प्रतिशत। Scheduled Castes को अलग श्रेणी में दर्ज किए जाने के कारण हिंदू जति और Scheduled Castes को जोड़कर करीब 2.17 प्रतिशत का आंकड़ा भी कुछ स्रोतों में दिखाई देता है। इसलिए खबरों में 2.17 प्रतिशत लिखते समय यह बताना अधिक सटीक होगा कि यह हिंदू जति और Scheduled Castes के संयुक्त आंकड़े से संबंधित है। आधिकारिक धार्मिक श्रेणी में केवल ‘Hindu’ का प्रतिशत 1.61 प्रतिशत है।

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के ‘4 प्रतिशत हिंदुओं को बर्दाश्त’ करने वाले कथित बयान ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति और आबादी के आंकड़ों पर नई बहस शुरू कर दी है। आधिकारिक 2023 जनगणना में हिंदू जति की हिस्सेदारी 1.61 प्रतिशत दर्ज है, जबकि Scheduled Castes को जोड़ने पर आंकड़ा करीब 2.17 प्रतिशत हो जाता है। ऐसे में 4 प्रतिशत का दावा आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों से मेल नहीं खाता।

विवाद का दूसरा और अहम पहलू ‘बर्दाश्त’ शब्द है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकार केवल सहनशीलता पर नहीं, बल्कि समान नागरिक अधिकारों, कानून के संरक्षण और धार्मिक स्वतंत्रता पर आधारित होने चाहिए। यही वजह है कि जरदारी के कथित बयान ने पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।


