By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा स्वरूप में परिसीमन बिल विपक्ष को बिल्कुल स्वीकार नहीं है। इसके साथ ही राहुल गांधी ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की ताकि सभी राजनीतिक दलों की राय लेकर आगे का रास्ता तय किया जा सके।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों का मानना है कि परिसीमन जैसी प्रक्रिया का सीधा असर देश की चुनावी राजनीति, राज्यों के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन पर पड़ सकता है। ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की सहमति आवश्यक है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि परिसीमन बिल के वर्तमान स्वरूप को विपक्ष स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए ताकि सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी चिंताओं और सुझावों को सामने रख सकें। राहुल गांधी का कहना है कि इतना बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक महत्व रखने वाला विषय केवल सरकार के निर्णय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सभी दलों को विश्वास में लेना जरूरी है।

सरकार से सर्वदलीय बैठक की मांग
राहुल गांधी ने सरकार से मांग की कि परिसीमन के मुद्दे पर सभी दलों की बैठक आयोजित की जाए। उनका तर्क है कि यदि सरकार पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है तो विपक्ष की चिंताओं को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया भविष्य में लोकसभा सीटों के वितरण और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जल्दबाजी में किसी भी निर्णय से बचना चाहिए।

परिसीमन क्या है?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का प्रतिनिधित्व संतुलित रहे। भारत में परिसीमन आयोग समय-समय पर जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यह प्रक्रिया पूरी करता है। हालांकि लंबे समय से सीटों के पुनर्वितरण का विषय राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है।

विपक्ष की प्रमुख चिंताएं
विपक्षी दलों का कहना है कि यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो कुछ राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं, जबकि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसी कारण विपक्ष चाहता है कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाई जाए और सभी राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।

सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से अभी तक यह संकेत दिया गया है कि परिसीमन से जुड़े सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को कानून और संविधान के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले सभी दलों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए।

राजनीतिक महत्व
राहुल गांधी के इस बयान के बाद परिसीमन का मुद्दा आगामी राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। संसद के भीतर और बाहर इस पर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कई क्षेत्रीय दल भी पहले से इस विषय पर चिंता जता चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन केवल सीटों की संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह संघीय ढांचे, राज्यों के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इस पर व्यापक सहमति बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या?
अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर रहेगी। यदि सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाती है तो विभिन्न राजनीतिक दलों को अपनी चिंताओं और सुझावों को रखने का अवसर मिलेगा। वहीं यदि सरकार बिना व्यापक चर्चा के आगे बढ़ती है तो संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।

फिलहाल राहुल गांधी का स्पष्ट संदेश यही है कि परिसीमन बिल वर्तमान स्वरूप में विपक्ष को स्वीकार नहीं है और लोकतांत्रिक संवाद के लिए सर्वदलीय बैठक आवश्यक है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


