By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर, संताल परगना ,झारखंड में औद्योगिक विकास को गति देने और इंडस्ट्रियल एरिया की जमीनी हकीकत जानने के उद्देश्य से फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने विशेष निरीक्षण अभियान की शुरुआत की है। इसी अभियान के तहत चैम्बर के सह सचिव रोहित पोद्दार ने शनिवार को संताल परगना प्रमंडल के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उद्योगों की मौजूदा स्थिति, आधारभूत संरचना और उद्यमियों की समस्याओं का विस्तृत आकलन किया गया।

निरीक्षण दल में संताल परगना प्रमंडल के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि केसरी, संताल परगना चैम्बर के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण शर्मा, संताल परगना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्य और उद्योग विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इस पूरे अभियान में उद्योग विभाग और जियाडा का सक्रिय सहयोग भी देखने को मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने देवघर स्थित डाबरग्राम इंडस्ट्रियल एरिया, जसीडीह फेज-1, जसीडीह फेज-2, देवीपुर इंडस्ट्रियल एरिया, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क और देवघर प्लास्टिक पार्क का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान सड़कों की स्थिति, बिजली व्यवस्था, जलापूर्ति, ड्रेनेज सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था, भूमि आवंटन और उद्योगों की मौजूदा गतिविधियों की समीक्षा की गई।

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क के सभागार में उद्यमियों के साथ विस्तृत संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां उद्यमियों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। इसके बाद जियाडा की क्षेत्रीय उप निदेशक दीपमाला के साथ समीक्षा बैठक भी हुई। बैठक में उद्योगों से जुड़ी लंबित समस्याओं के समाधान पर चर्चा की गई।
चैम्बर के सह सचिव रोहित पोद्दार ने सुझाव दिया कि उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक तीन माह में स्थानीय जिला चैम्बर और संताल परगना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के साथ समन्वय बैठक आयोजित की जाए। इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि जियाडा को एक अधिकृत अधिकारी नियुक्त करना चाहिए, जो हर 15 दिनों में इंडस्ट्रियल एरिया का नियमित निरीक्षण करे ताकि छोटी समस्याओं का समाधान समय पर हो सके।

निरीक्षण के दौरान उद्यमियों ने बताया कि प्रोजेक्ट में बदलाव होने पर “नेचर ऑफ बिजनेस चेंज” कराने में जियाडा स्तर पर काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि इस प्रक्रिया की नीतिगत समीक्षा आवश्यक है।
जसीडीह फेज-1 और फेज-2 में कई उद्यमियों को भूमि आवंटित होने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से पजेशन नहीं मिल पाया है। इसके कारण उद्योग शुरू नहीं हो सके हैं और उद्यमियों की करोड़ों रुपये की पूंजी फंसी हुई है। कई मामलों में बाउंड्री वॉल बनने और पजेशन मिलने के बाद भी स्थानीय विरोध के कारण उद्योग शुरू नहीं हो पाए हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने इंडस्ट्रियल एरिया में खराब अप्रोच रोड, साफ-सफाई की कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव को भी बड़ी समस्या बताया। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जसीडीह फेज-1 में बीएसएनएल का एक कार्यालय पिछले लगभग 15 वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। चैम्बर प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि ऐसी निष्क्रिय भूमि का आवंटन रद्द कर नए उद्यमियों को मौका दिया जाए।
देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि केसरी ने कहा कि वर्ष 2018 में देवीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में 81 उद्यमियों को भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन आज तक उन्हें पजेशन नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि यदि इन उद्योगों की स्थापना समय पर हो जाती, तो सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व मिलता और हजारों युवाओं को रोजगार भी प्राप्त होता।

उद्यमियों ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क के समीप पुलिस पिकेट स्थापित करने की मांग भी उठाई। वहीं देवघर प्लास्टिक पार्क के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि यहां लगभग 95 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक उद्योगों की स्थापना और भूमि आवंटन की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार यहां लगभग 102 यूनिट स्थापित होने की क्षमता है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन संभव हो सकता है।
चैम्बर के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक मल्लिक ने कहा कि सरकार को प्लास्टिक एसोसिएशन के साथ मिलकर बड़े स्तर पर इन्वेस्टमेंट मीट आयोजित करनी चाहिए। साथ ही प्लास्टिक पार्क के लिए आकर्षक औद्योगिक नीति और विशेष प्रोत्साहन पैकेज भी लागू करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार गंभीर पहल करे तो अगले एक वर्ष में यहां 102 उद्योग इकाइयों की स्थापना संभव है।

रोहित पोद्दार ने कहा कि संताल परगना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए इंडस्ट्रियल एरिया में फुल फ्लेज पजेशन दिलाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चैम्बर निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उद्योग सचिव और जियाडा प्रबंधन को सौंपेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई आकर्षक योजनाएं और प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर भूमि आवंटन, पजेशन, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो निवेशकों का विश्वास प्रभावित होगा।
संताल परगना प्रमंडल के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि क्षेत्र में उद्योगों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन वर्षों से लंबित पजेशन, आधारभूत सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण उद्यमियों में निराशा का माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर समस्याओं का समाधान करे तो संताल परगना बड़े निवेश का केंद्र बन सकता है और स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने शंकरपुर रेलवे स्टेशन और प्रस्तावित रेलवे यार्ड का भी निरीक्षण किया। प्रतिनिधियों ने इसे संताल परगना क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए काफी उपयोगी बताया।
निरीक्षण के दौरान पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक मल्लिक, संताल परगना चैम्बर के सचिव निरंजन सिंह, सह सचिव पंकज भालोटिया, देवघर चैम्बर के कोषाध्यक्ष पंकज मोदी, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्य रितेश टिबड़ेवाल, पेंच सिंघल, आलोक सिंह, राकेश कुमार, अमर कुमार और निरंजन उपाध्याय समेत कई उद्यमी उपस्थित रहे। पूरे भ्रमण के दौरान जियाडा के औद्योगिक पदाधिकारी पियूष शील ने भी सक्रिय सहयोग दिया।

