By: Mala Mandal
Sawan 2026 Date: भगवान शिव को समर्पित सावन (श्रावण) का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शुभ महीनों में से एक माना जाता है। इस पूरे माह में शिव भक्त व्रत रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं, रुद्राभिषेक कराते हैं और भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हर साल सावन की शुरुआत को लेकर लोगों के मन में उत्सुकता रहती है। इस बार भी कई लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि सावन 2026 की शुरुआत 29 जुलाई से होगी या 30 जुलाई से?

दरअसल, अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं के कारण तिथियों में अंतर देखने को मिलता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि दोनों तिथियों का आधार क्या है और आपके क्षेत्र में किस पंचांग का पालन किया जाता है।
29 जुलाई या 30 जुलाई, कब से शुरू होगा सावन?
उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार सावन माह की शुरुआत 29 जुलाई 2026, बुधवार से मानी जा रही है। वहीं इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन होगा। वहीं द्रिक पंचांग और अमांत परंपरा के अनुसार श्रावण मास 30 जुलाई 2026, गुरुवार से प्रारंभ माना गया है। यही कारण है कि इंटरनेट और विभिन्न कैलेंडरों में 29 और 30 जुलाई दोनों तिथियां देखने को मिल रही हैं। धार्मिक दृष्टि से दोनों तिथियां अपने-अपने पंचांग और परंपरा के अनुसार सही मानी जाती हैं। श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र में प्रचलित पंचांग के अनुसार ही व्रत और पूजा करनी चाहिए।

सावन का धार्मिक महत्व
सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने इसी काल में ग्रहण किया था, जिसके बाद देवताओं ने उन्हें जल अर्पित कर विष के प्रभाव को शांत किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से शिव पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

सावन 2026 के सभी सोमवार
सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। उत्तर भारत में प्रचलित तिथियों के अनुसार सावन के सोमवार इस प्रकार हैं—
– 3 अगस्त 2026
– 10 अगस्त 2026
– 17 अगस्त 2026
– 24 अगस्त 2026
इन चारों सोमवार को शिव मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का आयोजन किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर भोलेनाथ की आराधना करेंगे।

सावन में कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सावन के प्रत्येक सोमवार सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
शाम के समय शिव मंदिर में दीपक जलाकर आरती करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।

सावन में इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में सात्विक भोजन करना, क्रोध से बचना, जरूरतमंदों की सहायता करना और नियमित रूप से भगवान शिव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इस दौरान मांसाहार, नशा और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु पूरे महीने शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी कराते हैं।

क्यों खास होता है सावन?
सावन केवल एक धार्मिक महीना नहीं बल्कि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों—काशी विश्वनाथ, बाबा बैद्यनाथ धाम, महाकालेश्वर, केदारनाथ, ओंकारेश्वर और सोमनाथ—में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रा भी इसी महीने आयोजित होती है, जिसमें भक्त पवित्र नदियों से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

इस वर्ष भी सावन का महीना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक उत्साह और भक्ति का अवसर लेकर आने वाला है। यदि आप सावन सोमवार का व्रत रखने या शिव पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो अपने क्षेत्र में मान्य पंचांग के अनुसार तिथि की पुष्टि अवश्य कर लें।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, विभिन्न पंचांगों और उपलब्ध ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूर्णिमांत और अमांत पंचांग के कारण सावन प्रारंभ होने की तिथि में अंतर हो सकता है। किसी विशेष पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य की सलाह अवश्य लें।


