By: Mala Mandal
House Foundation Beliefs: भारत में घर बनाना केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट का काम नहीं माना जाता, बल्कि इसे धार्मिक आस्था, वास्तु शास्त्र और परंपराओं से भी जोड़ा जाता है। यही वजह है कि घर की नींव रखने से पहले पूजा-पाठ, भूमि पूजन और कई विशेष धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है घर की नींव में नाग-नागिन का जोड़ा रखना। आपने कई बार लोगों को यह कहते सुना होगा कि नए घर की नींव में चांदी, तांबे या धातु से बने नाग-नागिन का जोड़ा रखा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की असली वजह क्या है?

धार्मिक ग्रंथों, वास्तु शास्त्र और पुराणों में इस परंपरा का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि नाग-नागिन का जोड़ा घर को नकारात्मक ऊर्जा, दोष और बुरी शक्तियों से बचाने का प्रतीक माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस परंपरा के पीछे का धार्मिक, आध्यात्मिक और वास्तु संबंधी रहस्य।
क्यों रखा जाता है नींव में नाग-नागिन का जोड़ा?
हिंदू धर्म में नागों को अत्यंत पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान रहते हैं, वहीं भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं। पुराणों में नागों को पृथ्वी और पाताल लोक का रक्षक बताया गया है। यही कारण है कि जब घर की नींव रखी जाती है, तब नाग-नागिन का जोड़ा भूमि की सुरक्षा और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। कई लोग इसे वास्तु दोष दूर करने का उपाय भी मानते हैं।

वास्तु शास्त्र में क्या है महत्व?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की नींव सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यदि नींव मजबूत और शुभ ऊर्जा से युक्त हो, तो घर में सकारात्मकता बनी रहती है। वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक नाग-नागिन का जोड़ा भूमि ऊर्जा को संतुलित करने का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में धन, सुख और शांति का वास होता है। कई लोग भूमि पूजन के समय चांदी के नाग-नागिन, पंचधातु या तांबे की मूर्ति नींव में स्थापित करते हैं ताकि घर में कभी आर्थिक संकट न आए।

पुराणों में क्या कहा गया है?
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में नागों का विशेष महत्व बताया गया है। शेषनाग को पृथ्वी का आधार माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पूरी पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है। इसी कारण घर की नींव में नाग-नागिन रखने की परंपरा को स्थिरता और सुरक्षा से जोड़ा जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता भूमि के रक्षक होते हैं। इसलिए जब नई जमीन पर निर्माण कार्य शुरू किया जाता है, तब नाग देवता का स्मरण करके उनसे आशीर्वाद मांगा जाता है।

क्या वैज्ञानिक कारण भी हैं?
हालांकि इस परंपरा का सीधा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परंपरा लोगों को मानसिक संतोष और सकारात्मक विश्वास देती है। भारतीय संस्कृति में घर बनाते समय धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य परिवार में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना भी होता है।
इसके अलावा पुराने समय में लोग प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए भी ऐसी परंपराएं निभाते थे। नागों को धरती और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था।

नींव पूजन के दौरान और क्या रखा जाता है?
कई जगहों पर नींव पूजन के समय नाग-नागिन के साथ सिक्के, पंचधातु, हल्दी, चावल, सुपारी और नवग्रह से जुड़ी वस्तुएं भी रखी जाती हैं। मान्यता है कि इससे घर में बरकत और समृद्धि बनी रहती है।
कुछ लोग वास्तु शांति के लिए विशेष मंत्रों के साथ भूमि पूजन कराते हैं ताकि घर में किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न करे।

क्या आज भी लोग निभाते हैं यह परंपरा?
आधुनिक समय में भी भारत के कई हिस्सों में यह परंपरा निभाई जाती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और पारंपरिक परिवारों में नींव पूजन के दौरान नाग-नागिन का जोड़ा रखना शुभ माना जाता है। कई लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हैं तो कुछ इसे केवल परंपरा के रूप में निभाते हैं।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, वास्तु शास्त्र और पुराणों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य सूचना प्रदान करना है। विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं। किसी भी धार्मिक कार्य को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

