देवघर/धार्मिक डेस्क। हिंदू धर्म में भगवान की आराधना के कई स्वरूप बताए गए हैं, जिनमें आरती का विशेष महत्व है। इन्हीं आरतियों में एक प्रमुख और अत्यंत पावन आरती है मंगला आरती। मंगला आरती भगवान की दिन की पहली आरती मानी जाती है, जो प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न होती है। यह आरती विशेष रूप से भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, शिवजी, माता दुर्गा एवं अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में की जाती है। मंगला आरती को करने से भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है।

मंगला आरती का अर्थ
“मंगला” शब्द का अर्थ होता है — कल्याण, शुभता और मंगल।
अर्थात मंगला आरती वह आरती है, जो दिन की शुरुआत भगवान से मंगल कामना के साथ की जाती है। यह आरती यह दर्शाती है कि भक्त अपना पूरा दिन ईश्वर को समर्पित करते हुए आरंभ कर रहा है।
मंगला आरती का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में किया गया पूजन और आरती अत्यंत फलदायी होता है। इस समय वातावरण शुद्ध, शांत और सात्विक होता है। मंगला आरती के माध्यम से भगवान को निद्रा से जगाकर उनकी सेवा की जाती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त प्रतिदिन मंगला आरती में सम्मिलित होता है या अपने घर में मंगला आरती करता है, उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेषकर वैष्णव परंपरा में मंगला आरती को अत्यंत अनिवार्य माना गया है।
मंदिरों में मंगला आरती की परंपरा
देश के प्रसिद्ध मंदिरों जैसे—
श्री जगन्नाथ मंदिर (पुरी)
बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन)
द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात)
बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर)
इन सभी मंदिरों में मंगला आरती प्रातः 4 से 5 बजे के बीच संपन्न होती है। इस आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
मंगला आरती करने की विधि-विधान
मंगला आरती करने के लिए विशेष विधि-विधान बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठना
सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त (सुबह लगभग 4 बजे) में उठकर स्नान करना चाहिए। शुद्ध वस्त्र धारण कर मन को शांत रखें।
सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त (सुबह लगभग 4 बजे) में उठकर स्नान करना चाहिए। शुद्ध वस्त्र धारण कर मन को शांत रखें।
2. पूजा स्थल की तैयारी
घर या मंदिर में पूजा स्थल को स्वच्छ करें। भगवान की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक, धूप, फूल और नैवेद्य की व्यवस्था करें।
घर या मंदिर में पूजा स्थल को स्वच्छ करें। भगवान की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक, धूप, फूल और नैवेद्य की व्यवस्था करें।
3. भगवान का आह्वान
भगवान का ध्यान करते हुए उन्हें निद्रा से जगाने की भावना रखें। घंटी या शंख का प्रयोग कर वातावरण को पवित्र करें।
भगवान का ध्यान करते हुए उन्हें निद्रा से जगाने की भावना रखें। घंटी या शंख का प्रयोग कर वातावरण को पवित्र करें।
4. दीप प्रज्वलन
घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर भगवान के समक्ष रखें। दीपक को दोनों हाथों से श्रद्धा भाव से घुमाया जाता है।
घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर भगवान के समक्ष रखें। दीपक को दोनों हाथों से श्रद्धा भाव से घुमाया जाता है।
5. मंगला आरती का गायन
आरती के समय मंगला आरती के श्लोक या भजन का उच्च स्वर में गायन किया जाता है। जैसे—
“ॐ जय जगदीश हरे…” या मंदिर परंपरा के अनुसार विशेष मंगला आरती पद।
आरती के समय मंगला आरती के श्लोक या भजन का उच्च स्वर में गायन किया जाता है। जैसे—
“ॐ जय जगदीश हरे…” या मंदिर परंपरा के अनुसार विशेष मंगला आरती पद।
6. पुष्प और नैवेद्य अर्पण
आरती के बाद भगवान को फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें।
आरती के बाद भगवान को फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें।
7. क्षमा प्रार्थना और प्रार्थना
अंत में भगवान से दिनभर की मंगल कामना करते हुए प्रार्थना करें।
अंत में भगवान से दिनभर की मंगल कामना करते हुए प्रार्थना करें।
मंगला आरती से मिलने वाले लाभ
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
दिन की शुभ शुरुआत
आत्मिक बल और एकाग्रता में वृद्धि
घर में सुख-समृद्धि और शांति
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
गृहस्थ जीवन में मंगला आरती का महत्व
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सुबह जल्दी उठकर पूजा नहीं कर पाते, लेकिन जो लोग मंगला आरती को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, उनके जीवन में अनुशासन और संतुलन देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मंगला आरती मानसिक तनाव को भी कम करने में सहायक होती है।

मंगला आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह जीवन को अनुशासित, पवित्र और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। अगर इसे श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।

