By: Mala Mandal
Parama Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से अधिक मास में पड़ने वाली परमा एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत, पूजा और व्रत कथा का श्रवण करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि परमा एकादशी का व्रत करने से धन, सुख, समृद्धि, संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सनातन परंपरा के अनुसार अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। इसी कारण इस महीने आने वाली परमा एकादशी का धार्मिक महत्व बेहद खास हो जाता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करते हैं।
परमा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में कांपिल्य नगर में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ निवास करता था। दोनों अत्यंत धर्मपरायण और भगवान विष्णु के भक्त थे, लेकिन उनके जीवन में आर्थिक तंगी बनी रहती थी। अनेक प्रयासों के बावजूद उनकी गरीबी दूर नहीं हो रही थी।
एक दिन उनके घर महर्षि कौण्डिन्य का आगमन हुआ। ब्राह्मण दंपति ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ ऋषि का स्वागत किया। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि ने उनकी परेशानी का कारण पूछा। तब सुमेधा और पवित्रा ने अपनी दरिद्रता और कठिन जीवन की कहानी सुनाई।

महर्षि कौण्डिन्य ने उन्हें अधिक मास में आने वाली परमा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह व्रत सभी पापों का नाश करने वाला और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला है। ऋषि के निर्देशानुसार दंपति ने पूरी श्रद्धा के साथ परमा एकादशी का व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और रात्रि जागरण भी किया।
व्रत के प्रभाव से कुछ ही समय बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। उन्हें धन, सम्मान और सुख की प्राप्ति हुई। जीवन की सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त हो गईं। अंततः उन्हें भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हुई। तभी से परमा एकादशी व्रत को अत्यंत फलदायी माना जाता है।

परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के संचित पापों का नाश होता है। यह व्रत दरिद्रता, रोग, मानसिक तनाव और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना गया है। भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। जो भक्त इस दिन श्रद्धा से व्रत रखते हैं और व्रत कथा सुनते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

परमा एकादशी पूजा विधि
परमा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या विष्णु मंत्रों का जप करें। दिनभर व्रत रखें और शाम को आरती के बाद व्रत कथा का श्रवण करें। रात्रि जागरण करना भी शुभ माना जाता है।

परमा एकादशी 2026 पर क्या करें
भगवान विष्णु का ध्यान करें।
तुलसी दल अर्पित करें।
गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दें।
व्रत कथा का पाठ और श्रवण करें।
विष्णु सहस्रनाम का जप करें।
सात्विक जीवनशैली अपनाएं।

परमा एकादशी का यह पावन व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ करने पर व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सांसारिक सुखों की भी प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रीहरि विष्णु की भक्ति करने वाले भक्तों की सभी उचित मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। NewsBag इसकी पूर्ण सत्यता या प्रमाणिकता का दावा नहीं करता। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत को करने से पहले संबंधित विद्वान या आचार्य की सलाह अवश्य लें।

