By: Vikash Kumar (Vicky)
पाकुड़। झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इलाके में सोमवार सुबह एक बड़े हादसे ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। पाकुड़ जिले के मालपहाड़ी थाना क्षेत्र के कान्हुपुर गांव और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मुरारई थाना क्षेत्र के गोपालपुर के बीच मणिपुर गांव के समीप संचालित एक पत्थर खदान में अचानक मिट्टी और चट्टानों का विशाल हिस्सा भरभराकर नीचे गिर पड़ा। इस हादसे में खदान में काम कर रहे कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसे के समय खदान में करीब एक दर्जन मजदूर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि खदान के ऑफिस के पास ऊपरी हिस्से में काफी मात्रा में मिट्टी और चट्टान जमा थी। अचानक यह पूरा ढेर भरभराकर नीचे गिर पड़ा और नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। इस हादसे में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक हादसे में करीब आधा दर्जन मजदूरों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद स्थानीय लोगों और मजदूरों के साथियों ने मलबा हटाकर दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी।
हादसे की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि मलबे के नीचे कई मजदूर दबे हुए थे। कुछ मजदूरों को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया और इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भेजा गया।

इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस इलाके में लंबे समय से अवैध खनन का खेल चल रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को इसकी सूचना भी दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि खदान का संचालन तृणमूल कांग्रेस से जुड़े एक स्थानीय नेता सिराजुल खान के द्वारा कराया जा रहा था।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते अवैध खनन पर कार्रवाई करता तो शायद यह बड़ा हादसा टल सकता था। घटना के बाद ग्रामीणों ने खदान संचालकों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई है।

वहीं खदान प्रबंधन से जुड़े लोगों का दावा है कि खदान पश्चिम बंगाल क्षेत्र में स्थित है और जहां से मिट्टी और चट्टान गिरी है वह हिस्सा भी पश्चिम बंगाल की सीमा के अंतर्गत आता है। दूसरी ओर स्थानीय सूत्रों का कहना है कि खनन का काम झारखंड की जमीन पर किया जा रहा था और हादसा भी झारखंड क्षेत्र में ही हुआ है। ऐसे में अब यह मामला झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़ा विवाद भी बनता नजर आ रहा है।
घटना के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि घटना स्थल की सही स्थिति और सीमा निर्धारण की जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा किस राज्य की सीमा में हुआ है।

इधर ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि हादसे के तुरंत बाद खदान में मौजूद बड़ी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया और शवों को जल्दबाजी में वहां से निकाल लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि कुल कितने मजदूर मलबे में दबे थे और कितने शव निकाले गए।
सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दो शव दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
इस हादसे के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मजदूरों के परिजन और स्थानीय लोग लगातार घटनास्थल पर जुटे हुए हैं और अपने परिजनों की जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी होने की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा से सटे इस इलाके में अवैध खनन लंबे समय से जारी है और इस कारण कई बार छोटे-बड़े हादसे होते रहे हैं। बावजूद इसके खनन माफियाओं के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे मजदूरों की जान जोखिम में बनी रहती है।
फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के पीछे लापरवाही किसकी थी। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
