By: Vikash, Mala Mandal
रांची/देवघर: झारखंड में एक बार फिर सरकारी भर्तियों को लेकर सियासत गरमा गई है। Jharkhand Public Service Commission (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा की Answer Key को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ झामुमो (JMM) और कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार का बचाव किया है।

दरअसल, हाल ही में आयोजित JPSC प्रारंभिक परीक्षा के बाद जारी की गई संभावित उत्तर कुंजी (Answer Key) पर कई अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। परीक्षार्थियों का आरोप है कि कई प्रश्नों के उत्तर गलत हैं, वहीं कुछ प्रश्नों में त्रुटियां भी सामने आई हैं। इसको लेकर छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और कई जगहों पर विरोध भी देखने को मिला है।

छात्रों के आरोपों ने बढ़ाई परेशानी
जानकारी के मुताबिक, कई उम्मीदवारों ने परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कुछ छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र में दोहराव (repetition) और विकल्पों में गलतियां पाई गई हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में प्रश्नों के नंबरिंग में भी गड़बड़ी सामने आई है, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। इन आरोपों के बाद अब Answer Key पर भी विवाद खड़ा हो गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर Answer Key में सुधार नहीं किया गया तो उनके भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

BJP ने साधा सरकार पर निशाना
इस पूरे मामले को लेकर BJP ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में भर्ती प्रक्रियाएं लगातार विवादों में घिरी रहती हैं और सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। BJP का आरोप है कि JPSC जैसी महत्वपूर्ण संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

JMM और कांग्रेस ने किया बचाव
वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन के दल JMM और कांग्रेस ने BJP के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि JPSC एक स्वायत्त (autonomous) संस्था है और सरकार सीधे तौर पर इसके कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करती। सरकार के नेताओं का कहना है कि Answer Key जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया पहले से तय है और सभी अभ्यर्थियों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम इन आपत्तियों की समीक्षा करेगी और अंतिम Answer Key जारी की जाएगी।

पहले भी विवादों में रही है JPSC
यह पहला मौका नहीं है जब JPSC परीक्षा या उससे जुड़ी प्रक्रिया विवादों में आई हो। इससे पहले भी प्रश्नपत्र लीक, परिणाम में देरी और Answer Key में गलतियों को लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं। कई मामलों में तो अदालत को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है।
इसके अलावा, परीक्षार्थियों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन भी किए जाते रहे हैं, जिससे यह मुद्दा राज्य की राजनीति में अहम बनता जा रहा है।

सरकार और आयोग की प्रक्रिया क्या है?
JPSC की ओर से जारी प्रक्रिया के अनुसार, प्रारंभिक Answer Key जारी होने के बाद उम्मीदवारों से आपत्तियां मांगी जाती हैं। इसके बाद विशेषज्ञों द्वारा जांच कर Final Answer Key जारी की जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह एक पारदर्शी प्रक्रिया है और किसी भी प्रकार की त्रुटि को सुधारने का पूरा अवसर दिया जाता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है।
युवाओं में बढ़ रही नाराजगी
हालांकि, लगातार विवादों के कारण युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली गड़बड़ियों से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता नहीं लाई गई, तो इसका असर राज्य के युवाओं के भरोसे पर पड़ेगा।
क्या होगा आगे?
फिलहाल, JPSC Answer Key विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आयोग आपत्तियों पर क्या फैसला लेता है और Final Answer Key में क्या बदलाव होते हैं।
यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब अभ्यर्थियों का विरोध तेज होता है या विपक्ष इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाता है।
JPSC Answer Key विवाद ने एक बार फिर झारखंड की भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं सरकार इसे एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है। अब देखना होगा कि इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है और क्या इससे भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सकेगा।

