By: Vikash, Mala Mandal
पंडा धर्मरक्षणि सभा के महामंत्री निर्मल मंटू झा के नेतृत्व में धरना, मंदिर प्रशासन पर मनमानी और मिलीभगत के आरोप
देवघर, गुरुवार: बाबा नगरी देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में गुरुवार को उस समय माहौल गरमा गया जब जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन के खिलाफ पंडा धर्मरक्षणि सभा के बैनर तले पुरोहित समाज के लोगों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध का नेतृत्व सभा के महामंत्री निर्मल मंटू झा ने किया। मंदिर परिसर में आयोजित इस धरना प्रदर्शन में दर्जनों की संख्या में तीर्थपुरोहित मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई।

धरना दे रहे पुरोहितों ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन “पिल पाया” द्वार के माध्यम से अनावश्यक और अनऑथराइज्ड तरीके से लोगों को प्रवेश दे रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है और इससे मंदिर की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

धरना को संबोधित करते हुए पंडा धर्मरक्षणि सभा के महामंत्री निर्मल मंटू झा ने कहा कि यह एक दिवसीय धरना है, जिसका मुख्य उद्देश्य मंदिर प्रशासन की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पुरोहित समाज प्रशासन की गलतियों की ओर ध्यान दिलाता है, तो उन्हें धमकाया जाता है और झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश की जाती है।
मंटू झा ने कहा, “मंदिर प्रशासन पूरी तरह मनमानी पर उतर आया है। यहां तैनात कर्मी अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर गलत गतिविधियों में लिप्त हैं। अगर हम इसका विरोध करते हैं, तो हमें दबाने की कोशिश की जाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि पंडा समाज वीआईपी श्रद्धालुओं के प्रवेश का विरोध नहीं करता, लेकिन इसके नाम पर हो रहे दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। “जो श्रद्धालु वास्तव में वीआईपी हैं और प्रोटोकॉल के तहत आते हैं, उन्हें ‘पिल पाया’ द्वार से प्रवेश दिया जाना चाहिए, इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर ड्यूटी पर तैनात कर्मी अपने रिश्तेदारों और परिचितों को विशेष सुविधा दिला रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है,” उन्होंने कहा।

सभा के महामंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में तैनात कुछ कर्मचारी होटल से अपने परिचितों को लेकर आते हैं और उन्हें वीआईपी बनाकर “पिल पाया” द्वार से प्रवेश दिलाते हैं। उन्होंने इसे न केवल नियमों का उल्लंघन बताया, बल्कि मंदिर की पवित्रता के साथ खिलवाड़ भी कहा।
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यह स्थिति “नमक का दरोगा” कहानी जैसी हो गई है, जहां लोग अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और यह सोच रहे हैं कि “अभी कमाने का समय है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियां किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

धरना प्रदर्शन के दौरान पुरोहित समाज के अन्य पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी और प्रशासन से पारदर्शिता तथा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की। सभा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खबाड़े, पूर्व महामंत्री दुर्लभ मिश्रा सहित सैकड़ों की संख्या में तीर्थ पुरोहित इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि “पिल पाया” द्वार पर सख्त निगरानी रखी जाए और केवल अधिकृत वीआईपी श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई।
धरना के कारण मंदिर परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, हालांकि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन की ओर से सतर्कता बरती गई। फिलहाल इस पूरे मामले पर मंदिर प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

धार्मिक नगरी देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। इस ताजा विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर मंदिर प्रबंधन और पुरोहित समाज के बीच चल रहे तनाव को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले को कैसे सुलझाता है और क्या पुरोहित समाज की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

