By: Vikash Kumar (vicky)
देवघर। देवघर नगर थाना क्षेत्र के हिरन मोहल्ला निवासी मोहम्मद साकिब ने एक एलआईसी एजेंट पर पॉलिसी के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित ने नगर थाना में लिखित आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

नगर थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, करीब सात वर्ष पूर्व मोहम्मद साकिब ने एलआईसी एजेंट सुधीर कुमार के माध्यम से एक जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। पीड़ित का आरोप है कि उस समय एजेंट ने उन्हें बताया था कि यह पॉलिसी 10 वर्षों में मैच्योर हो जाएगी और निर्धारित अवधि पूरी होने पर उन्हें जमा राशि के साथ लाभ प्राप्त होगा। एजेंट की बातों पर विश्वास कर उन्होंने नियमित रूप से किस्तों का भुगतान करना शुरू कर दिया।

मोहम्मद साकिब का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों तक पॉलिसी की किस्तें जमा कीं। इस दौरान कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये जमा किए गए। जब वह हाल ही में एलआईसी कार्यालय पहुंचे और पॉलिसी से संबंधित जानकारी लेकर जमा राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करना चाही, तब उन्हें वास्तविक जानकारी मिली। कार्यालय में उन्हें बताया गया कि संबंधित पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 10 वर्ष तक प्रीमियम जमा करना अनिवार्य है, जबकि पॉलिसी की परिपक्वता (मैच्योरिटी) अवधि 20 वर्ष है। यह जानकारी सुनकर वह हैरान रह गए।

पीड़ित का आरोप है कि एजेंट ने शुरुआत से ही पॉलिसी की शर्तों के बारे में गलत जानकारी दी। यदि उन्हें वास्तविक अवधि और नियमों की जानकारी पहले से होती तो वह इस पॉलिसी में निवेश नहीं करते। उनका कहना है कि उन्हें भ्रमित कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पॉलिसी के दौरान एजेंट की ओर से उन्हें लोन भी दिलाया गया। पीड़ित का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद वर्तमान में उनके खाते में शून्य (जीरो) बैलेंस की स्थिति हो गई है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि आखिर जमा की गई राशि और लोन की प्रक्रिया के बाद उनकी वित्तीय स्थिति इस तरह कैसे प्रभावित हो गई।

मोहम्मद साकिब ने नगर थाना से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंट के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि उनकी जमा की गई राशि और पॉलिसी से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।

फिलहाल पुलिस ने आवेदन प्राप्त कर मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। जांच के दौरान आवेदन में लगाए गए आरोपों, पॉलिसी दस्तावेजों तथा संबंधित एजेंट से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभी तक आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यह मामला उन लोगों के लिए भी एक सीख है जो किसी भी बीमा पॉलिसी में निवेश करने से पहले केवल एजेंट की मौखिक बातों पर भरोसा कर लेते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी बीमा योजना में निवेश से पहले उसकी सभी शर्तों, प्रीमियम अवधि, मैच्योरिटी अवधि और लाभ संबंधी जानकारी को दस्तावेजों में स्वयं पढ़कर या संबंधित कार्यालय से सत्यापित अवश्य कर लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।



