By: Vikash, Mala Mandal
देवघर:अक्सर पुलिस की छवि सख्त और कानून-व्यवस्था तक सीमित मानी जाती है, लेकिन झारखंड के देवघर में पुलिस ने इस सोच को बदलते हुए इंसानियत और संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की है। देवघर पुलिस की ‘सम्मान’ योजना आज बुजुर्गों के लिए सहारा बनती जा रही है। इस पहल के तहत पुलिस अब सिर्फ अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन बुजुर्गों तक पहुंच रही है जो अकेले जीवन बिता रहे हैं।

क्या है ‘सम्मान’ योजना?
देवघर पुलिस द्वारा शुरू की गई ‘सम्मान’ योजना का मुख्य उद्देश्य 70 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे बुजुर्गों की देखभाल करना है, जो अकेले रहते हैं या जिनके पास नियमित देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इस योजना के तहत ऐसे बुजुर्गों की पहचान कर उन्हें पुलिस से जोड़ा जाता है, ताकि वे खुद को सुरक्षित और समर्थ महसूस कर सकें।

योजना के तहत प्रत्येक बुजुर्ग को एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी से जोड़ा गया है। यह अधिकारी हर 15 दिन में उनके घर जाकर मुलाकात करता है, उनका हालचाल जानता है और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करता है।
कैसे काम कर रही है यह योजना?
‘सम्मान’ योजना महज एक औपचारिक पहल नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। पुलिस अधिकारी नियमित रूप से बुजुर्गों के घर जाकर न केवल उनसे बातचीत करते हैं, बल्कि उनकी सुरक्षा का भी पूरा आकलन करते हैं। इस दौरान घर के दरवाजों और खिड़कियों की मजबूती, आसपास के माहौल, पड़ोसियों की स्थिति और घरेलू सहायकों या किरायेदारों का सत्यापन किया जाता है। इसका मकसद है कि बुजुर्ग किसी भी तरह के अपराध या धोखाधड़ी का शिकार न हों।

समस्याओं के समाधान में भी आगे पुलिस
देवघर पुलिस की यह पहल सिर्फ सुरक्षा जांच तक सीमित नहीं है। यदि किसी बुजुर्ग को किसी प्रकार की समस्या होती है, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, पुलिस उसे हल कराने में भी मदद करती है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी घर के सामने नाली टूटी हुई है, सड़क खराब है या किसी अन्य नागरिक सुविधा से जुड़ी परेशानी है, तो पुलिस संबंधित विभाग से संपर्क कर समाधान कराने की कोशिश करती है।

अब तक 27 बुजुर्ग जुड़े
पुलिस के अनुसार, अब तक इस योजना के तहत 27 बुजुर्गों को जोड़ा जा चुका है। आने वाले समय में इस संख्या को और बढ़ाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद बुजुर्गों को इसका लाभ मिल सके।

अकेलेपन और डर को कर रही दूर
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य बुजुर्गों के मन से डर और अकेलेपन को खत्म करना है। आज के समय में जब कई बुजुर्ग अपने परिवार से दूर या अकेले रह रहे हैं, ऐसे में पुलिस का यह कदम उन्हें मानसिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है।जब पुलिस अधिकारी नियमित रूप से घर आकर हालचाल लेते हैं, तो बुजुर्गों को यह एहसास होता है कि वे अकेले नहीं हैं और कोई उनकी परवाह करने वाला है।

समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश
देवघर पुलिस की ‘सम्मान’ योजना समाज के लिए एक मजबूत संदेश भी देती है। यह पहल दिखाती है कि अगर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए, तो वर्दी केवल कानून का प्रतीक नहीं रहती, बल्कि भरोसे और सुरक्षा का भी प्रतीक बन जाती है।
इस पहल से पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास भी मजबूत हो रहा है। लोग पुलिस को अब सिर्फ सख्त अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक मददगार और सहयोगी के रूप में देखने लगे हैं।

भविष्य में विस्तार की योजना
देवघर पुलिस का कहना है कि इस योजना को और व्यापक बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में अधिक बुजुर्गों को चिन्हित कर इस पहल से जोड़ा जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसमें नई सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी।

