By: Vikash, Mala Mandal
झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। Jharkhand TET 2026 यानी झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। भाषा चयन को लेकर उठे विवाद ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते सरकार को नई नियमावली को रद्द करना पड़ा है। इस फैसले के बाद राज्य में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

दरअसल, झारखंड में लंबे समय से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। सरकार द्वारा इस कमी को दूर करने के लिए Jharkhand TET 2026 की तैयारी की जा रही थी। लेकिन परीक्षा में भाषा चयन को लेकर उठे विवाद ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है।
क्या है पूरा भाषा विवाद?
झारखंड एक बहुभाषी राज्य है, जहां हिंदी के अलावा संथाली, हो, मुंडारी, बंगाली, उर्दू और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं। नई TET नियमावली में भाषा विषय के चयन को लेकर कई बदलाव किए गए थे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि नई नियमावली में कुछ भाषाओं को प्राथमिकता दी गई, जबकि कई स्थानीय भाषाओं को नजरअंदाज किया गया। इसी मुद्दे को लेकर छात्रों और विभिन्न संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यह नियमावली झारखंड की भाषाई विविधता के खिलाफ है और इससे कई योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।

सरकार का बड़ा फैसला
बढ़ते विरोध और विवाद को देखते हुए झारखंड सरकार ने नई TET नियमावली को रद्द करने का फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी पक्षों की सहमति से नई और संतुलित नियमावली तैयार नहीं हो जाती, तब तक परीक्षा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इस फैसले के बाद Jharkhand TET 2026 की पूरी प्रक्रिया फिलहाल ठप हो गई है। इसका सीधा असर उन लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जो लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।

अभ्यर्थियों में बढ़ी नाराजगी
नियमावली रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि बार-बार नियम बदलने से उनकी तैयारी पर असर पड़ रहा है। कई अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द स्पष्ट और स्थायी नियमावली बनाई जाए, ताकि परीक्षा समय पर हो सके। कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकार को पहले ही सभी पक्षों से चर्चा कर नियमावली बनानी चाहिए थी, ताकि इस तरह की स्थिति पैदा न होती।

शिक्षा व्यवस्था पर असर
Jharkhand TET 2026 में देरी का असर केवल अभ्यर्थियों पर ही नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में नई नियुक्तियां रुकने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर आने वाले वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि Jharkhand TET 2026 कब होगा और नई नियमावली कैसी होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी भाषाई समूहों और विशेषज्ञों के साथ बैठक कर नई नियमावली तैयार की जाएगी।
सरकार का प्रयास होगा कि नई नीति में सभी भाषाओं को समान महत्व दिया जाए और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।

Jharkhand TET 2026 का मामला यह दर्शाता है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन कितना जरूरी होता है। भाषा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना व्यापक सहमति के निर्णय लेना सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।
फिलहाल, शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही इस विवाद का समाधान निकालकर नई नियमावली के साथ परीक्षा प्रक्रिया को फिर से शुरू करेगी।

